Edited By Himansh sharma, Updated: 02 Sep, 2026 05:36 PM

मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव की 29 अगस्त 2026 की दिल्ली से रीवा चार्टर्ड उड़ान को लेकर कुछ गंभीर सवाल सामने आए हैं।
भोपाल। मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव की 29 अगस्त 2026 की दिल्ली से रीवा चार्टर्ड उड़ान को लेकर कुछ गंभीर सवाल सामने आए हैं। सवाल मध्य प्रदेश सरकार की कार्यप्रणाली पर नहीं, बल्कि उस निजी विमानन व्यवस्था से जुड़े लोगों पर हैं, जिसके जरिए मुख्यमंत्री ने यह यात्रा की। 29 अगस्त की शाम करीब 8:30 बजे मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने दिल्ली से रीवा के लिए निजी चार्टर्ड विमान से उड़ान भरी। इस उड़ान में पायलट इन कमांड के तौर पर कैप्टन एच.एस. विर्डी के होने की जानकारी सामने आई है।
यहीं से मामला गंभीर हो जाता है।
जिस पायलट का पुराना रिकॉर्ड सवालों में रहा, वही मुख्यमंत्री की उड़ान में PIC क्यों? कैप्टन एच.एस. विर्डी का नाम इससे पहले भी अनिवार्य Breath Analyzer (BA) Test से जुड़े मामलों में सामने आ चुका है। वर्ष 2016 में महाराष्ट्र के तत्कालीन मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस की कुछ उड़ानों को लेकर BA टेस्ट नहीं होने संबंधी रिपोर्ट का उल्लेख सामने आया था।इसके बाद 17 फरवरी 2022 को भी BA टेस्ट से जुड़े एक मामले में कैप्टन विर्डी के खिलाफ कार्रवाई की गई थी। शुरुआती तौर पर एक महीने का निलंबन और बाद में उसे बढ़ाकर तीन महीने किए जाने की जानकारी सामने आई।
अब सवाल यह है कि ऐसे पुराने नियामकीय विवादों का पायलट के वर्तमान रिकॉर्ड पर क्या प्रभाव था? क्या 29 अगस्त की उड़ान से पहले उनकी पूरी एविएशन हिस्ट्री और DGCA रिकॉर्ड की समीक्षा हुई थी?

विमान ऑपरेटर का रिकॉर्ड भी जांच के दायरे में
जिस विमान से मुख्यमंत्री ने यात्रा की, वह रेडबर्ड एयरवेज प्राइवेट लिमिटेड से जुड़ा बताया जा रहा है। विमान को शाश्वत एविएशन सर्विसेज प्राइवेट लिमिटेड के माध्यम से मध्य प्रदेश सरकार के लिए उपलब्ध कराया गया था। रेडबर्ड एयरवेज से जुड़ा एक और तथ्य फरवरी 2026 की झारखंड विमान दुर्घटना है। 23 फरवरी 2026 को चतरा जिले के सिमरिया के पास बीचक्राफ्ट C90A विमान दुर्घटनाग्रस्त हुआ था, जिसमें सात लोगों की मौत हुई थी। यहां यह स्पष्ट करना जरूरी है कि किसी विमान ऑपरेटर के साथ हुई दुर्घटना अपने आप उसकी किसी दूसरी उड़ान को असुरक्षित साबित नहीं करती। दुर्घटना की वास्तविक वजह जांच रिपोर्ट से ही तय होती है। लेकिन मुख्यमंत्री की सुरक्षा के संदर्भ में यह सवाल जरूर महत्वपूर्ण है कि क्या उस ऑपरेटर का पूरा सुरक्षा रिकॉर्ड और नियामकीय स्थिति संबंधित अधिकारियों के संज्ञान में थी?

शाश्वत एविएशन से जुड़े व्यक्ति पर भी सवाल
विमान उपलब्ध कराने वाली कंपनी शाश्वत एविएशन सर्विसेज प्राइवेट लिमिटेड के निदेशक अरविंद मेहरा को लेकर भी विभिन्न मामलों में आरोप और कानूनी विवाद होने की जानकारी सामने आ रही है।यदि ये दावे सही हैं, तो यह भी जांच का विषय होना चाहिए कि मुख्यमंत्री जैसे संवैधानिक पद पर बैठे व्यक्ति की चार्टर्ड उड़ान से जुड़े निजी सेवा प्रदाता के चयन में उसके संचालकों की पृष्ठभूमि और नियामकीय स्थिति किस स्तर तक जांची जाती है। यहां यह भी महत्वपूर्ण है कि किसी व्यक्ति पर मामला दर्ज होना अपराध सिद्ध होने के बराबर नहीं है। अंतिम स्थिति न्यायिक प्रक्रिया से ही तय होती है।
सवाल सरकार से नहीं, सिस्टम में मौजूद उन लोगों से है जो मुख्यमंत्री की सुरक्षा से जुड़े हैं
मुख्यमंत्री की सुरक्षा की जिम्मेदारी बेहद गंभीर है। इसलिए सवाल यह नहीं है कि सरकार ने क्या किया, बल्कि सवाल यह है कि मुख्यमंत्री की चार्टर्ड उड़ान उपलब्ध कराने वाली निजी व्यवस्था में शामिल लोगों ने सुरक्षा के हर मानक का कितना पालन किया? अगर पायलट का पुराना रिकॉर्ड सवालों में रहा है, तो उसकी वर्तमान पात्रता और रिकॉर्ड की जांच कौन करता है? अगर ऑपरेटर से जुड़ा कोई पुराना सुरक्षा विवाद रहा है, तो उसकी समीक्षा कौन करता है? और अगर निजी विमानन व्यवस्था में किसी स्तर पर लापरवाही हुई, तो उसकी जवाबदेही किसकी तय होगी?

सबसे बड़ा सवाल
मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव की सुरक्षा में किसी भी तरह का समझौता स्वीकार नहीं किया जा सकता। इसलिए जरूरत है कि 29 अगस्त की इस चार्टर्ड उड़ान से जुड़े पायलट, विमान और ऑपरेटर के नियामकीय रिकॉर्ड की निष्पक्ष जांच हो और यदि किसी स्तर पर नियमों की अनदेखी सामने आती है तो जिम्मेदार व्यक्ति पर कार्रवाई की जाए।
क्योंकि सवाल बेहद गंभीर है
मुख्यमंत्री मोहन यादव की जान से खिलवाड़ करने की कोशिश आखिर कौन कर रहा है?