MP के लाखों छात्रों के लिए बड़ी खुशखबरी, CM मोहन ने खातों में डाले 304 करोड़ से ज्यादा रूपए

Edited By Vandana Khosla, Updated: 01 Sep, 2026 01:52 PM

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भोपाल। स्कूली छात्रों के लिए 1 सितंबर का दिन बेहद खास रहा। इन छात्रों ने मुख्यमंत्री डॉ. यादव को इतना प्रभावित किया कि वे बच्चों की तारीफ करने से खुद को रोक नहीं सके। इन स्कूली छात्रों की प्रतिभा देख लोग हैरान थे और हर बात पर तालियों से उनका स्वागत...

भोपाल। स्कूली छात्रों के लिए 1 सितंबर का दिन बेहद खास रहा। इन छात्रों ने मुख्यमंत्री डॉ. यादव को इतना प्रभावित किया कि वे बच्चों की तारीफ करने से खुद को रोक नहीं सके। इन स्कूली छात्रों की प्रतिभा देख लोग हैरान थे और हर बात पर तालियों से उनका स्वागत कर रहे थे। सीएम डॉ. यादव जिन छात्रों से मिले, उनमें से कुछ बच्चों ने तो 12वीं के साथ-साथ नीट और जेईई मैन्स भी क्लीयर कर लिया था। ये सुनकर प्रदेश के मुखिया ने खुद बच्चों के लिए तालियां बजवाईं। मौका था भोपाल के कुशाभाऊ ठाकरे अंतर्राष्ट्रीय सभागार में आयोजित 'प्रतिभाशाली विद्यार्थी प्रोत्साहन योजना' कार्यक्रम का। कार्यक्रम के तहत सीएम डॉ. यादव ने 12वीं में 75% से ज्यादा नंबर लाने वाले विद्यार्थियों को लैपटॉप दिया। उन्होंने 1 लाख 21 हजार से ज्यादा विद्यार्थियों को लैपटॉप खरीदने के लिए 304 करोड़  रुपए से अधिक की राशि उनके खातों में ट्रांसफर की। इस तरह हर विद्यार्थी के खाते में 25-25 हजार रुपये आए। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कार्यक्रम में 10 विद्यार्थियों को मंच पर लैपटॉप प्रदान किए। कार्यक्रम की खास बात यह रही कि सीएम डॉ. यादव ने विद्यार्थियों के साथ रिमोट का बटन क्लिक करवाकर रुपये ट्रांसफर कराए।

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गौरतलब है कि, मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने मंच पर ही विद्यार्थियों से संवाद किया। उन्होंने छात्रों से पूछा कि वे बड़े होकर क्या बनना चाहते हैं। छात्र वीरेंद्र सिंह बुंदेला ने कहा कि मैं राजनेता बनना चाहता हूं। इस पर सीएम डॉ. यादव ने कहा कि यह भी हमारे लिए जरूरी है। बच्चे राजनेता बनकर देश को दिशा देने में बड़ी भूमिका निभा सकते हैं। एक सवाल के जवाब में बुंदेला ने कहा कि मैंने लोगों की परेशानी देखी है। एक राजनेता उन परेशानियों को दूर कर सकता है। उन्होंने कहा कि जब मैंने देखा कि कोई राजनीति नहीं करना चाहता, तो मैंने फैसला किया कि मैं वो करूंगा जो कोई नहीं करना चाहता। मैं देश का विकास करना चाहता हूं। उसके बाद सीएम डॉ. मोहन ने बच्चों से पूछा कि किस-किस के घर में खेती-किसानी होती है और कौन-कौन किसान बनना चाहता है। उन्होंने छात्रों की प्रतिक्रिया देखने के बाद कहा कि हमारी जड़ खेती-किसानी है। बच्चे कहते हैं डॉक्टर बनेंगे, वकील बनेंगे, इंजीनियर बनेंगे, लेकिन कोई नहीं कहता कि मैं किसान बनना चाहता हूं। आप बताइए खेती के बिना काम चलेगा क्या। उन्होंने कहा कि किसान अगर मेहनत करके अन्न नहीं उगाएगा, तो क्या होगा। इसी तरह अगर हम राजनीति करने के लिए खड़े नहीं होंगे, तो अच्छे राजनेता कहां से आएंगे। छात्रा हिमांशी पाठक ने कहा कि मैं शुरूआत एयर होस्टेस बनकर करना चाहती हूं, लेकिन मेरा अंतिम उद्देश्य एंटरप्रिन्योर बनना है। आज कॉम्पटीशन ज्यादा है। इसलिए अपना काम करना ही उचित होगा। इस पर सीएम डॉ. मोहन ने कहा कि इसे सरल भाषा में कहा जाता है कि हम नौकरी पाने वाले नहीं, नौकरी देने वाले बनेंगे। इस बीच पूरा हॉल हिमांशी की उस बात पर ठहाकों से गूंज उठा, जब उसने कहा कि मैंने इस दृश्य को सपने में देखा है। मैंने देखा था कि इसी तरह का हॉल है और मैं मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के साथ मंच पर हूं।

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बच्चे छोटे, लेकिन सपने और प्रयास बड़े हैं
छात्रा मान्यता साहू ने कहा कि मैं इस लैपटॉप से बहुत काम करूंगी। ये लैपटॉप मेरी बहुत मदद करेगा। अरिमा इमरान ने कहा कि मैं नीट का एग्जाम दूंगी और मेरा उद्देश्य डॉक्टर बनना है। मैं गरीबों की सेवा करना चाहती हूं। उसके बाद कीर्ति ने माइक हाथ में थामा। उसके हाथ में लगी मेहंदी देखकर सीएम डॉ. मोहन ने कहा कि मैं भी मेहंदी लगा लेता हूं। अपनी बहन को मैं ही मेहंदी लगाता था। कीर्ति ने कहा कि मैं कॉस्ट एंड मैनेजमेंट में करियर बनाना चाहती हूं। इसके बाद तन्वी ने माइक थामा। उसके माइक पकड़ते ही सीएम डॉ. मोहन ने सभी को बताया कि तन्वी 12वीं की पढ़ाई करते-करते मेडिकल कॉलेज भी पहुंच गई है। उसने नीट भी क्लीयर कर लिया। पहली बार में ही दोनों एग्जाम क्लीयर कर लिए। तन्वी ने कहा कि वह डॉक्टर बनना चाहती है। याशी ने 75 फीसदी नहीं लाने विद्यार्थियों को प्रोत्साहित किया। उसने बताया कि वह आईएएस बनना चाहती है। उसके बाद ओम चौकसे ने बताया कि मैंने 12वीं के साथ-साथ नीट-जेईई मैन्स-सीयूएलटी भी क्लीयर किया है। इस पर सीएम डॉ. मोहन ने कहा कि आदमी छोटा लेकिन छलांग बड़ी है। ओम ने कहा कि मैं डॉक्टर बनना चाहता हूं। सीएम डॉ. मोहन ने बताया कि ओम के पिता जी बैग बनाकर दुनिया चलाते हैं। उनके पास दुकान भी नहीं है। अभिषेक ने बताया कि वह इसरो का साइंटिस्ट बनना चाहता है।

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असफलता को न लगाएं दिल से
कार्यक्रम में मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा है विद्यार्थी अपनी मेहनत से सफलता प्राप्त कर परिवार और प्रदेश का मान बढ़ाते हैं। सफलता को कभी स्वयं पर हावी नहीं होने देना है। अगर जीवन में कभी असफलता मिले तो उसे कभी दिल पर नहीं लगाना। हम जहां हैं, वहीं सामान्य बने रहें और हमेशा मन में आगे बढ़ने का जज्बा कायम रखें। हमें अपनी पिछली गलतियों से सबक भी लेना चाहिए, क्योंकि एक अच्छा इंसान कागज पर मिले नंबरों से नहीं बनता, अच्छा इंसान मन के अंदर से बनता है। देश युवाओं को आगे बढ़ते हुए देखना चाहता है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में देश आगे बढ़ रहा है। मध्यप्रदेश सरकार भी इस विकास यात्रा में कदम से कदम मिलाकर साथ चल रही है। आपकी नॉलेज (ज्ञान) और स्किल (कौशल) ही सफलता के दो मित्र हैं। नॉलेज जीवन का साथी है और स्किल जीवन में दक्षता लाती है। दोनों हमारे जीवन में सदैव मददगार सिद्ध होते हैं। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि राज्य सरकार सभी प्रतिभाओं को प्रोत्साहित करने के लिए प्रतिबद्ध है। प्रतिभाशाली विद्यार्थी प्रोत्साहन योजना अंतर्गत पहले वर्ष 473 बच्चों को लैपटॉप दिए थे। पिछले साल लगभग 92 हजार और इस वर्ष स्कूल शिक्षा और जनजातीय कार्य विभाग के लगभग 1 लाख 22 हजार विद्यार्थी लैपटॉप योजना से लाभान्वित हुए हैं। मप्र बोर्ड की परीक्षाओं की मेरिट लिस्ट में 50 प्रतिशत से अधिक विद्यार्थी सरकारी स्कूलों से आते हैं। सीमित संसाधनों के बाद भी स्कूल शिक्षा विभाग ने उत्कृष्ट कार्य कर दिखाया है। इसके लिए सभी अधिकारी और शिक्षक बधाई के पात्र हैं।

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बेहतर शिक्षा के लिए प्रतिबद्ध सरकार
मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि हमारी सरकार ने बोर्ड परीक्षाओं में शत प्रतिशत परीक्षा परिणाम दिलाने वाले शासकीय स्कूलों के प्राचार्य, शिक्षकों और विद्वानों को गुरु पूर्णिमा के अवसर पर सम्मानित किया है। इनके कार्यों के स्कूल शिक्षा विभाग और प्रदेश सरकार गौरवान्वित होती है और सीना गर्व से चौड़ा हो जाता है। हम अपनी समृद्धि और अतीत का गौरवशाली पृष्ठ दोबारा खोलने जा रहे हैं। जीवन में आगे बढ़ने के लिए हमें अपने मन में संकल्प और दृढ़ निश्चय की आवश्यकता है। बड़े लक्ष्य तय करें और उन्हें हासिल करने के लिए परिश्रम करें। दुनिया में भारत का बढ़ता सम्मान हमें निरंतर आगे बढ़ने की प्रेरणा देता है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि राज्य सरका स्कूल शिक्षा की बेहतरी के लिए प्रतिबद्ध है। बच्चों को नि:शुल्क पाठ्य पुस्तकें, ड्रेस, साइकिलें, लैपटॉप और स्कूटी भी प्रदान की जा रही हैं। लेकिन, प्रदेश के स्कूलों में कभी वह दौर भी था, जब बच्चों को स्कूलों में बैठने तक के इंतजाम नहीं हुआ करते थे। हमारी सरकार ने तेजी से नए मेडिकल कॉलेज खोलने प्रारंभ किए हैं। प्रदेश में आजादी के बाद 55 साल में केवल 5 मेडिकल कॉलेज थे। अब हमारी सरकार में निजी और शासकीय मिलाकर कुल 33 मेडिकल कॉलेज हो चुके हैं। राज्य में अभी साढ़े 6 हजार से अधिक एमबीबीएस की सीटें हैं। दो साल में हमने 5 नए मेडिकल कॉलेज खोले। इनमें यूजी के लिए 2400 सीटें बढ़ गईं। राज्य सरकार ने वर्ष 2028 तक कुल 55 मेडिकल कॉलेज और 10 हजार यूजी सीटों का लक्ष्य तय किया है।

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सरकारी में शून्य हुआ ड्रॉप आउट
स्कूल शिक्षा मंत्री उदय प्रताप सिंह ने कहा कि मुख्यमंत्री डॉ. यादव के नेतृत्व में प्रदेश की शिक्षण व्यवस्था बेहतर हो रही है। कक्षा 12वीं में प्रथम प्रयास में 75 प्रतिशत या अधिक अंक पाने वाले मेधावी विद्यार्थियों को आधुनिक तकनीक से जोड़ने के लिए लैपटॉप राशि दी जा रही है। पिछले साल भी लगभग 92 हजार विद्यार्थी लैपटॉप योजना से लाभान्वित हुए थे। माता-पिता और बच्चों का परिश्रम तथा शिक्षकों का बेहतर प्रबंधन के कारण ही इस वर्ष 1.21 लाख से अधिक विद्यार्थी लैपटॉप प्राप्त करने के लिए पात्र बने हैं। यह लैपटॉप विद्यार्थियों की कॉलेज की पढ़ाई को सरल और डिजिटल करेगा। नई शिक्षा नीति के अंतर्गत डिजिटलीकरण को प्रोत्साहित किया गया है। उन्होंने कहा कि हमारी सरकार ने पिछले ढाई साल में लगभग पौने 3 लाख विद्यार्थियों को लैपटॉप क्रय करने के लिए राशि वितरित की है। लैपटॉप खरीदने के लिए प्रतिभाशाली विद्यार्थी प्रोत्साहन योजना के अंतर्गत अब तक कुल साढ़े 6 लाख विद्यार्थियों को 1620 करोड़ रुपए विद्यार्थियों के खातों में भेजे गए हैं। प्रदेश के सरकारी स्कूलों में पिछले 3 साल में प्रवेश दर बढ़ती जा रही है। हमारी सरकार के प्रयासों से स्कूली बच्चों की ड्रॉप आउट दर शून्य हो गई है। स्कूलों में शिक्षकों की कोई कमी नहीं है। हमारे स्कूलों में 70 से 72 हजार अतिथि शिक्षक कार्यरत हैं। राज्य सरकार लगभग 18 हजार रिक्त पदों पर शिक्षकों की भर्ती के लिए प्रतिबद्ध है। बच्चे हमारे देश का भविष्य और प्रदेश की आशा हैं। हमारे बच्चे 2047 में विकसित भारत का नेतृत्व करेंगे।

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