Edited By Himansh sharma, Updated: 08 Jun, 2026 12:25 PM

मध्यप्रदेश की राजनीति में राज्यसभा चुनाव को लेकर सियासी तापमान लगातार बढ़ता जा रहा है।
भोपाल। मध्यप्रदेश की राजनीति में राज्यसभा चुनाव को लेकर सियासी तापमान लगातार बढ़ता जा रहा है। भारतीय जनता पार्टी द्वारा तीसरी राज्यसभा सीट पर महेश केवट को उम्मीदवार बनाए जाने के बाद मुकाबला अब पूरी तरह रोचक और प्रतिष्ठा का विषय बन गया है। भाजपा के इस दांव के बाद कांग्रेस भी पूरी तरह सतर्क हो गई है और अपने विधायकों को एकजुट रखने के लिए विशेष रणनीति पर काम कर रही है। कांग्रेस की राज्यसभा प्रत्याशी मीनाक्षी नटराजन सोमवार को अपना नामांकन दाखिल करेंगी। इस अवसर पर प्रदेश प्रभारी हरीश चौधरी, प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष जीतू पटवारी, नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार, पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह सहित पार्टी के सभी विधायक मौजूद रहेंगे। कांग्रेस ने अपने विधायकों को स्पष्ट निर्देश दिए हैं कि वे नामांकन प्रक्रिया में शामिल रहें, ताकि एकजुटता का संदेश दिया जा सके।
भाजपा के तीसरे उम्मीदवार की घोषणा के बाद राजनीतिक गलियारों में विधायकों की संभावित खरीद-फरोख्त को लेकर चर्चाएं तेज हो गई हैं। इसी आशंका के मद्देनजर कांग्रेस अपने विधायकों की बाड़ाबंदी करने की तैयारी में है। सूत्रों के अनुसार पार्टी अपने विधायकों को कर्नाटक की राजधानी बेंगलुरू या तेलंगाना की राजधानी हैदराबाद स्थित किसी रिसॉर्ट में ठहरा सकती है। मतदान की तारीख 18 जून तक सभी विधायकों को वहीं रखा जाएगा और फिर सीधे मतदान के लिए मध्यप्रदेश विधानसभा लाया जाएगा।
प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष जीतू पटवारी ने भाजपा पर निशाना साधते हुए कहा कि उनके सभी विधायक पूरी तरह एकजुट हैं और मीनाक्षी नटराजन का राज्यसभा पहुंचना तय है। उन्होंने आरोप लगाया कि भाजपा के पास विधायकों की खरीद-फरोख्त के लिए असीमित संसाधन हैं, लेकिन कांग्रेस अपने जनप्रतिनिधियों के साथ मजबूती से खड़ी है।
इस बीच मीनाक्षी नटराजन ने भी राजनीतिक संपर्क अभियान तेज कर दिया है। उन्होंने रविवार को पूर्व केंद्रीय मंत्री अरुण यादव के निवास पर पहुंचकर मुलाकात की। इस दौरान विधायक सचिन यादव भी मौजूद रहे। इसके अलावा उन्होंने कई अन्य कांग्रेस विधायकों से भी संपर्क साधा।
राज्यसभा की तीसरी सीट को लेकर भाजपा और कांग्रेस के बीच छिड़ी यह सियासी जंग अब केवल संख्या बल का खेल नहीं रह गई है, बल्कि दोनों दलों की राजनीतिक प्रतिष्ठा भी इससे जुड़ गई है। आने वाले दिनों में यह मुकाबला मध्यप्रदेश की राजनीति का सबसे चर्चित घटनाक्रम बन सकता है।