Edited By Himansh sharma, Updated: 08 Jun, 2026 07:39 PM

मध्यप्रदेश में राज्यसभा चुनाव की सरगर्मियों के बीच वरिष्ठ नेता और पूर्व सांसद लक्ष्मण सिंह ने एक बार फिर कांग्रेस पार्टी के नेतृत्व पर तीखा हमला बोला है।
गुना। मध्यप्रदेश में राज्यसभा चुनाव की सरगर्मियों के बीच वरिष्ठ नेता और पूर्व सांसद लक्ष्मण सिंह ने एक बार फिर कांग्रेस पार्टी के नेतृत्व पर तीखा हमला बोला है। गुना दौरे पर पहुंचे लक्ष्मण सिंह ने कहा कि कांग्रेस को अपने विधायकों पर भरोसा रखना चाहिए। यदि पार्टी को अपने ही निर्वाचित जनप्रतिनिधियों के टूटने या दूसरी ओर जाने का डर है, तो यह संगठन और नेतृत्व की कमजोरी को दर्शाता है।मीडिया से चर्चा करते हुए लक्ष्मण सिंह ने कहा कि राज्यसभा चुनाव में कांग्रेस अपना उम्मीदवार जीताने में सक्षम है, लेकिन पार्टी अनावश्यक रूप से घबराई हुई नजर आ रही है। उन्होंने कहा कि अब हालात पहले जैसे नहीं हैं, क्योंकि ज्योतिरादित्य सिंधिया अब कांग्रेस में नहीं हैं।
लक्ष्मण सिंह ने कहा, अब सिंधिया जी बीजेपी में चले गए हैं, इसलिए कांग्रेस को किसी तरह का खतरा नहीं होना चाहिए। पार्टी को अपने विधायकों पर भरोसा रखना चाहिए। आखिर इतनी घबराहट और डर किस बात का है? उन्होंने आगे कहा कि यदि किसी पार्टी को अपने ही विधायकों के दूसरी तरफ जाने का डर सताता है, तो यह नेतृत्व पर सवाल खड़े करता है। आपको अपने विधायकों पर विश्वास होना चाहिए। अगर विधायक इधर-उधर जाने की सोचते हैं तो इसका मतलब है कि उन्हें नेतृत्व पर भरोसा नहीं है। हम शुरू से कह रहे हैं कि दिल्ली का नेतृत्व कमजोर है और उसमें बदलाव की जरूरत है।
ऊपर से फैसले थोपना कांग्रेस की सबसे बड़ी समस्या
लक्ष्मण Singh ने संगठनात्मक ढांचे पर भी सवाल उठाते हुए कहा कि कांग्रेस तभी मजबूत होगी, जब फैसले ऊपर से थोपने के बजाय जमीनी स्तर पर लिए जाएंगे। उनका कहना था कि पार्टी के कार्यकर्ताओं और बूथ स्तर पर संघर्ष करने वाले नेताओं को महत्व मिलना चाहिए।
उन्होंने कहा कि भाजपा का संगठन इसलिए मजबूत दिखाई देता है क्योंकि वहां कई निर्णय नीचे से ऊपर की ओर आते हैं, जबकि कांग्रेस में कार्यकर्ताओं की आवाज अक्सर अनसुनी रह जाती है। राज्यसभा उम्मीदवार चयन को लेकर भी उन्होंने परोक्ष रूप से नाराजगी जताते हुए कहा कि पार्टी को जमीनी कार्यकर्ताओं को अवसर देना चाहिए था।
बयान से फिर गरमाई कांग्रेस की अंदरूनी राजनीति
राज्यसभा चुनाव से ठीक पहले लक्ष्मण सिंह का यह बयान कांग्रेस की अंदरूनी राजनीति में नई चर्चा का विषय बन गया है। पहले भी कई मौकों पर पार्टी नेतृत्व की कार्यशैली पर सवाल उठा चुके लक्ष्मण सिंह ने इस बार सीधे तौर पर नेतृत्व की कमजोरी और विधायकों पर भरोसे की कमी को मुद्दा बनाया है। ऐसे में उनके बयान को कांग्रेस के भीतर बढ़ती असहजता और नेतृत्व को लेकर उठ रहे सवालों से जोड़कर देखा जा रहा है।