राज्यसभा सीट को लेकर MP कांग्रेस में मंथन, प्रदेश के ये कद्दावर नेता सबसे मजबूत दावेदार, इन बाहरी नेताओं पर विचार कर रही पार्टी

Edited By meena, Updated: 31 May, 2026 10:05 PM

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मध्य प्रदेश में आगामी 18 जून को होने वाले राज्यसभा चुनाव को लेकर सियासी सरगर्मियां तेज हो गई हैं। प्रदेश की तीन राज्यसभा सीटों पर चुनाव होना है, जिनमें से एक सीट कांग्रेस के खाते में जाती दिखाई दे रही है...

भोपाल : मध्य प्रदेश में आगामी 18 जून को होने वाले राज्यसभा चुनाव को लेकर सियासी सरगर्मियां तेज हो गई हैं। प्रदेश की तीन राज्यसभा सीटों पर चुनाव होना है, जिनमें से एक सीट कांग्रेस के खाते में जाती दिखाई दे रही है। इसी बीच कांग्रेस में राज्यसभा सीट के कई दावेदारों की सूची निकलकर सामने आ रही है। इसमे कमलनाथ को प्रबल दावेदार माना जा रहा है। हालांकि अटकलें है कि कांग्रेस किसी बाहरी नेता को भी टिकट दे सकती है।

दिग्विजय सिंह पहले ही कर चुके हैं इनकार

मध्य प्रदेश से कांग्रेस की जो सीट खाली हो रही है, वह वर्तमान राज्यसभा सांसद दिग्विजय सिंह की है। दिग्विजय सिंह पहले ही सार्वजनिक रूप से घोषणा कर चुके हैं कि वे जून में होने वाले राज्यसभा चुनाव के लिए दोबारा उम्मीदवार नहीं बनना चाहते।
उनके इस फैसले के बाद कांग्रेस के सामने नया चेहरा चुनने की चुनौती खड़ी हो गई है। ऐसे में पूर्व मुख्यमंत्री कमलनाथ का नाम सबसे प्रमुख दावेदारों में शामिल माना जा रहा है।

कांग्रेस के पास उम्मीदवारों की लंबी सूची

सूत्रों के अनुसार कांग्रेस आलाकमान के पास राज्यसभा के लिए कई वरिष्ठ नेताओं के नाम विचाराधीन हैं। जिसमें राज्य से जीतू पटवारी, अरूण यादव, सज्जन सिंह वर्मा और बाहरी नेताओं के रूप में मल्लिकार्जुन खड़गे, पवन खेड़ा, बीके हरिप्रसाद और सुप्रिया श्रीनेत जैसे बडेे चेहरे हैं। वहीं राज्य से ही महिला प्रत्याशी के रुप में मीनाक्षी नटराजन शामिल है।
हालांकि मध्य प्रदेश की सीट के लिए स्थानीय और प्रभावशाली चेहरे को प्राथमिकता मिलने की संभावना अधिक मानी जा रही है।

कमलनाथ क्यों माने जा रहे हैं मजबूत दावेदार?

कांग्रेस के अंदरूनी सूत्रों का मानना है कि दिग्विजय सिंह के बाद कमलनाथ ही ऐसे नेता हैं जिनकी स्वीकार्यता पूरे प्रदेश में है। उनके नाम पर पार्टी विधायकों के एकजुट रहने की संभावना ज्यादा है। राजनीतिक विश्लेषकों का कहना है कि राज्यसभा चुनाव में क्रॉस वोटिंग का खतरा हमेशा बना रहता है। हरियाणा और ओडिशा में कांग्रेस पहले भी ऐसी स्थिति का सामना कर चुकी है। ऐसे में पार्टी किसी ऐसे उम्मीदवार पर दांव लगाना चाहेगी, जो सभी विधायकों को साथ रखने में सक्षम हो।

कांग्रेस की एक सीट पर टिकी नजरें

मध्य प्रदेश में राज्यसभा की तीन सीटों में से दो सीटें भाजपा और एक सीट कांग्रेस के खाते में जाने की संभावना है। कांग्रेस के लिए यह सीट बेहद महत्वपूर्ण मानी जा रही है, क्योंकि राष्ट्रीय स्तर पर पार्टी को सीमित सीटें ही मिल रही हैं। ऐसे में आने वाले दिनों में कांग्रेस आलाकमान का फैसला प्रदेश की राजनीति की दिशा तय कर सकता है।

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