सोने-चांदी के रेट में भारी उलट-फेर! सुबह सुबह लुढ़के चांदी के दाम, 80,000 से भी सस्ता होगा सोना

Edited By meena, Updated: 17 Feb, 2026 12:15 PM

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सोने-चांदी की कीमतों में उलट फेर जारी है। चांदी की बात करें तो 17 फरवरी को सुबह सुबह चांदी की कीमतों में भारी गिरावट दर्ज की गई है। वहीं सोने की बात करें तो इसकी कीमत आने वाले समय में 80,000...

एमपी डेस्क: सोने-चांदी की कीमतों में उलट फेर जारी है। चांदी की बात करें तो 17 फरवरी को सुबह सुबह चांदी की कीमतों में भारी गिरावट दर्ज की गई है। वहीं सोने की बात करें तो इसकी कीमत आने वाले समय में 80,000 से भी कम होने की संभावना जताई जा रही है। जिसे लेकर एक बार फिर  वैश्विक बाजार में बड़ी बहस तेज हो गई है। पिछले कुछ महीनों में भू-राजनीतिक तनाव, महंगाई की चिंता और केंद्रीय बैंकों की आक्रामक खरीदारी ने सोने को ऐतिहासिक स्तर तक पहुंचा दिया। 29 जनवरी को सोना रिकॉर्ड ऊंचाई पर पहुंचा, लेकिन अगले ही दिन तेज गिरावट ने निवेशकों को चौंका दिया। तब से बाजार में लगातार उतार-चढ़ाव बना हुआ है, जिससे भविष्य की दिशा को लेकर अनिश्चितता और बढ़ गई है।

आज के ताजा भाव

17 फरवरी 2026  को सोने और चांदी की कीमतों में एक बार फिर 'क्रैश'जैसी स्थिति दिख रही है। मंगलवार सुबह मल्टी कमोडिटी एक्सचेंज (MCX) पर चांदी 2,856 (1.19%) की भारी गिरावट के साथ 2,37,035 प्रति किलो के स्तर पर आ गई है। सोना की 1,053 (0.68%) टूटकर 1,53,707 प्रति 10 ग्राम पर ट्रेड कर रहा है। मल्टी कमोडिटी एक्सचेंज (MCX) पर आज सोने की कीमतों में बड़ी गिरावट देखने को मिल रही है। ताजा आंकड़ों के अनुसार, मंगलवार सुबह सोना 3,292 (2.13%) की भारी गिरावट के साथ 1,51,468 प्रति 10 ग्राम के स्तर पर आ गया है। आज के कारोबार के दौरान सोने ने 1,51,352 का निचले स्तर पर है। 

गिरावट की आशंका क्यों बढ़ी?

विशेषज्ञों के मुताबिक संभावित गिरावट का सबसे बड़ा कारण Russia की रणनीति में बदलाव हो सकता है। रूस ने पश्चिमी प्रतिबंधों के बाद डॉलर से दूरी बनाते हुए सोने की खरीद बढ़ाई थी। इससे वैश्विक मांग में उछाल आया और कीमतों को मजबूत समर्थन मिला। अब संकेत मिल रहे हैं कि यदि रूस दोबारा अमेरिकी डॉलर के लेनदेन की ओर झुकता है, तो वह अपने सोने के भंडार का कुछ हिस्सा बाजार में उतार सकता है। ऐसी स्थिति में वैश्विक सप्लाई बढ़ेगी और कीमतों पर दबाव बनेगा।

अमेरिका-रूस समीकरण और युद्ध का असर

यदि United States और रूस के बीच व्यापारिक संबंधों में सुधार होता है या Russia-Ukraine War में नरमी आती है, तो निवेशकों का झुकाव जोखिम वाले एसेट्स की ओर बढ़ सकता है।
अब तक युद्ध और वैश्विक तनाव के कारण सोना ‘सेफ हेवन’ के रूप में पसंद किया जा रहा था। लेकिन हालात सामान्य होने पर सुरक्षित निवेश की मांग घट सकती है, जिससे कीमतों में नरमी देखने को मिल सकती है।

ब्रिक्स देशों की भूमिका निर्णायक

BRICS देशों की भूमिका भी बेहद अहम मानी जा रही है। बीते छह महीनों में वैश्विक सोना खरीद में लगभग 50% हिस्सेदारी China, India, Brazil और South Africa जैसे देशों की रही है।
अगर ये देश डॉलर भंडार बढ़ाने की रणनीति अपनाते हैं और सोने की खरीद घटाते हैं, तो मांग में कमी आ सकती है। इससे अंतरराष्ट्रीय कीमतों में तेज गिरावट की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता।

रिसर्च रिपोर्ट क्या कहती है?

आर्थिक शोध संस्था Bloomberg की रिपोर्ट के मुताबिक, यदि वैश्विक दबाव बढ़ता है तो भारत में सोने की कीमतें 70,000 से 80,000 रुपये प्रति 10 ग्राम के दायरे में आ सकती हैं। हालांकि यह गिरावट अचानक नहीं बल्कि चरणबद्ध तरीके से हो सकती है। रिपोर्ट में यह भी संकेत है कि 2027 के अंत तक बाजार स्थिरता की ओर बढ़ सकता है, बशर्ते वैश्विक हालात में बड़ा नकारात्मक झटका न लगे।

आगे क्या?

कुल मिलाकर, सोने की हालिया तेजी के बाद बाजार अब सतर्क मोड में है। रूस की नीति, अमेरिका-रूस संबंध, ब्रिक्स देशों की खरीद रणनीति और वैश्विक भू-राजनीतिक परिस्थितियां आने वाले समय में कीमतों की दिशा तय करेंगी। यदि इन मोर्चों पर बड़ा बदलाव आता है, तो सोने की चमक फिलहाल थोड़ी फीकी पड़ सकती है लेकिन दीर्घकालिक निवेशकों के लिए यह अवसर भी साबित हो सकता है।
 

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