धान खरीदी केंद्र में 15 लाख से ज्यादा की गड़बड़ी! रिकॉर्ड में था धान, गोदाम से गायब मिला स्टॉक

Edited By meena, Updated: 07 Jun, 2026 06:30 PM

irregularities worth over 15 lakh at paddy procurement center

दुर्ग जिले के धमधा क्षेत्र स्थित सेवा सहकारी समिति मर्यादित रौंदा के धान उपार्जन केंद्र में लाखों रुपये की आर्थिक अनियमितता का मामला सामने आने से हड़कंप मच गया है। आकस्मिक निरीक्षण के दौरान...

धमधा (दुर्ग) : दुर्ग जिले के धमधा क्षेत्र स्थित सेवा सहकारी समिति मर्यादित रौंदा के धान उपार्जन केंद्र में लाखों रुपये की आर्थिक अनियमितता का मामला सामने आने से हड़कंप मच गया है। आकस्मिक निरीक्षण के दौरान रिकॉर्ड में दर्ज धान और वास्तविक भंडारण के बीच बड़ा अंतर पाए जाने पर प्रशासन ने इसे गंभीर वित्तीय गड़बड़ी मानते हुए समिति प्रभारी के खिलाफ एफआईआर दर्ज कराई है।

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जानकारी के अनुसार 29 मई को खाद्य विभाग, सहकारिता विभाग और जिला सहकारी केंद्रीय बैंक की संयुक्त जांच टीम ने धान उपार्जन केंद्र का अचानक निरीक्षण किया। निरीक्षण के दौरान दस्तावेजों में दर्ज स्टॉक और गोदाम में मौजूद धान का भौतिक सत्यापन किया गया। जांच में जो तथ्य सामने आए, उन्होंने अधिकारियों को भी चौंका दिया।

खरीफ विपणन वर्ष 2025-26 के रिकॉर्ड के अनुसार समिति द्वारा कुल 73,952.80 क्विंटल धान की खरीदी दर्ज की गई थी। इसमें से 65,657.62 क्विंटल धान मिलरों को जारी किया जा चुका था, जबकि 7,678.10 क्विंटल धान संग्रहण केंद्र भेजा गया बताया गया। इस हिसाब से उपार्जन केंद्र में 617.08 क्विंटल धान शेष होना चाहिए था। लेकिन जब टीम ने गोदाम का भौतिक सत्यापन किया तो वहां मात्र 142 कट्टों में रखा 56.80 क्विंटल सरना धान ही मिला। यानी रिकॉर्ड और वास्तविक स्टॉक के बीच 560.28 क्विंटल धान की कमी पाई गई।

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इतना ही नहीं, जांच के दौरान 2103 नए बारदाने भी रिकॉर्ड के अनुसार उपलब्ध नहीं मिले। धान और बारदानों की कुल कमी का मूल्यांकन 15 लाख 8 हजार 161 रुपये किया गया है। जांच टीम में जिला सहकारी केंद्रीय बैंक धमधा शाखा के प्रबंधक भूपेंद्र सिंह मढ़रिया, सहायक खाद्य अधिकारी शशि सिंह, खाद्य निरीक्षक सुधा महिलांग तथा सहकारिता निरीक्षक प्रजय सोनी शामिल थे। टीम ने मौके पर पंचनामा तैयार कर पूरे मामले का दस्तावेजीकरण किया और अपनी रिपोर्ट वरिष्ठ अधिकारियों को सौंप दी।

प्रारंभिक जांच में इसे सरकारी संपत्ति और सार्वजनिक धन से जुड़ी गंभीर वित्तीय अनियमितता माना गया है। इसके बाद संबंधित समिति प्रभारी के खिलाफ एफआईआर दर्ज कर पुलिस जांच शुरू कर दी गई है। अब यह पता लगाया जा रहा है कि धान और बारदानों की कमी लापरवाही का परिणाम है या फिर किसी सुनियोजित गबन का मामला।

इस कार्रवाई के बाद जिले की अन्य धान उपार्जन समितियों में भी हलचल बढ़ गई है। प्रशासन ने संकेत दिए हैं कि धान खरीदी और भंडारण व्यवस्था में पारदर्शिता सुनिश्चित करने के लिए आगे भी ऐसे आकस्मिक निरीक्षण जारी रहेंगे।

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