चिंता में डालने वाली खबर,देश में आने वाले 3 से 4 साल तक रहेगी LPG गैस किल्लत, सामने आई जानकारी से हलचल

Edited By Desh Raj, Updated: 15 Apr, 2026 10:29 PM

lpg shortage in the country expected to persist for the next 3 to 4 years

ईरान इजराइल अमेरिका जंग के बीच जहां ग्लोबल तनाव बढ़ा है वहीं पर आम जनता भी इसके दुष्प्रभावों से अछूती नहीं रही है। LPG गैस से लेकर तेल की किल्लत का सामना और देशों के तरह भारत को भी करना पड़ा है। हालांकि अभी युद्घ तनाव कुछ कम होने के आसार है लेकिन इस...

(डेस्क ): ईरान इजराइल अमेरिका जंग के बीच जहां ग्लोबल तनाव बढ़ा है वहीं पर आम जनता भी इसके दुष्प्रभावों से अछूती नहीं रही है। LPG गैस से लेकर तेल की किल्लत का सामना और देशों के तरह भारत को भी करना पड़ा है। हालांकि अभी युद्घ तनाव कुछ कम होने के आसार है लेकिन इस बीच एक खबर ऐसी है जो किसी को भी चिंता में डाल सकती है।

होर्मुज का रास्ता बंद होने से हुआ नुकसान अस्थायी या स्थायी,साफ नहीं

दरअसल मिडिल ईस्ट जंग के बीच भारत मे भी एलपीजी का संकट बढ़ा है। देश में एलपीजी की किल्लत होने के कारण भारत में कई कंपनियों ने नए नियम लागू कर दिए। LPG की कमी से देश के कई राज्यों को दो-चार होना पड़ा, जिसका असर स्ट्रीट फूड पर भी पड़ा और कई होटलों में भी प्रतिबंध लगाए गए। लेकिन अब जो खबर सामने आ रही है वो भी चिंतित करने वाली है। बताया जा रहा है कि LPG की किल्लत सिर्फ जंग तक नहीं, बल्कि अगले 3-4 सालों तक रह सकती है क्योंकि अभी इस बात की कोई पुष्टि नहीं हुई है कि प्रोडक्शन कुछ समय के लिए रुका है या उसे हमेशा के लिए नुकसान पहुंचा है।  अभी ये स्पष्ट नहीं है कि होर्मुज का रास्ता बंद होने से हुआ नुकसान अस्थायी है या स्थायी। इसलिए फ्यूल क्राइसिस से उबरने में कुछ साल लग सकते हैं।

दरअसल ईरान में एनर्जी इंफ्रास्ट्रक्चर पर हमले किए और स्ट्रेट ऑफ होर्मुज को बंद कर दिया, जिससे देश की एलपीजी सप्लाई पर गहरा सकंट पड़ गया। वहीं सरकारी अधिकारी के मुताबिक LPG संकट जल्द खत्म होने वाला नहीं है, सप्लायर्स से मिली जानकारी के आधार पर, सप्लाई को फिर से शुरू करने में तीन से 4 साल तक लग सकते हैं।  उन्होंने भारत के बढ़ते इंपोर्ट रिस्क और कॉस्ट के दबाव की ओर इशारा किया है।

गौर करने वाली बात है कि भारत में LPG की सालाना मांग लगभग 33 मिलियन टन है, और मार्च के आधे महीने तक  सिर्फ 15 दिनों की खपत के बराबर ही स्टोरेज क्षमता थी। लिहाजा इस आशंका ने चिंता की लकीरें खड़ी कर दी हैं।

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