MP में रातों रात यू नहीं हुए अधिकारियों के तबादले, इसके पीछे ये है मोहन सरकार का गणित

Edited By Desh Raj, Updated: 15 Feb, 2026 11:30 PM

mohan government is ready for the budget session congress is on the offensive

मध्य प्रदेश में कल यानिकि सोमवार से विधानसभा का बजट सत्र शुरु हो रहा है। बजट सत्र को लेकर जहां सरकार की तैयारी पूरी है वहीं कांग्रेस भी सरकार पर वार करने के लिए तैयार है। बजट सत्र में काफी नोंक-झोंक देखने को मिलेगी । प्रदेश में ऐसे बहुत से बर्निंग...

(भोपाल): मध्य प्रदेश में कल यानिकि सोमवार से विधानसभा का बजट सत्र शुरु हो रहा है। बजट सत्र को लेकर जहां सरकार की तैयारी पूरी है वहीं कांग्रेस भी सरकार पर वार करने के लिए तैयार है। बजट सत्र में काफी नोंक-झोंक देखने को मिलेगी । प्रदेश में ऐसे बहुत से बर्निंग मुद्दे हैं जिन पर कांग्रेस सरकार को संकट में डालने की कोशिश करेगी। लेकिन इन सब बीच सीएम मोहन यादव ने भी पलटवार का पूरा इंतजाम कर रखा है। मोहन यादव ने ऐसी फिल्डिंग सजा दी है जिससे कांग्रेस असहज हो सकती है।

आधी रात किए थे अधिकारियों के तबादले

दरअसल दो दिन पहले ही मोहन सरकार ने प्रशासनिक सर्जरी करके एक बड़ा दांव चल दिया है।सीरप कांड, आयुष्मान भारत योजना, इंदौर भागीरथपुरा दूषित जल मामला जैसे मामलों को लेकर उठने वाले सवालों का जवाब देने के लिए कदम उठा लिए हैं। सरकार ने इस मौके पर अहम प्रशासनिक सर्जरी करके कई चीजों से निजात पाने को लेकर काम कर दिया है। सरकार ने विपक्ष पर हावी होने के लिए अनुभवी और तेज तर्रार अधिकारियों को सीएम मोहन यादव ने फ्रंट पर तैनात कर दिया है। मुख्यमंत्री ने 12 अधिकारियों के तबादले करके साफ संदेश देने का काम किया है।

मोर्चे पर तैयार हैं अनुभवी अधिकारी

सीएम ने विपक्ष के तेवरो को देखते हुए 2009 बैच के अधिकारी मनीष सिंह को सरकारी कार्यक्रम और योजनाओं की ब्रांडिंग का जिम्मा दिया है। वहीं  स्वास्थ्य विभाग में बड़ा बदलाव करके  अनुभवी औ अधिकारी अपर मुख्य सचिव अशोक बर्णवाल को जिम्मा सौंपा है। वे कृषि उत्पादन आयुक्त भी हैं । ये सारे तबालदे आधी रात  हुई थे और प्रशासनिक गलियारों में हड़कंप मच गया था।

कई अधिकारियों के नामों पर हुई  काफी माथापच्ची

जानकारी के मुताबिक आयुक्त जनसंपर्क के पद पर काफी माथापच्ची हुई। कई नामों पर विचार हुआ लेकिन फिर मुख्यमंत्री मोहन ने मनीष सिंह का नाम फाइनल किया ।  वहीं अभिजीत अग्रवाल भी सरकार के भरोसेमंद अधिकारी हैं क्योंकि  दो बार आबकारी नीति बनवाई, । वहीं दूसरी ओर सीएम के विश्वासपात्र दीपक सक्सेना को आबकारी आयुक्त जैसा अहम दायित्व दिया है  । संदीप यादव भी मोहन यादव के भरोसे वाले अधिकारी माने जाते है। जबकि दीपक सक्सेना ने भी सरकार की छवि को गढ़ने के लिए प्रयास किया है। फिलहाल कल से बजट सत्र शुरु होने वाला है और मोर्चे पर तैनात होंगें अनुभवी और तुरुप के इक्के। लिहाजा देखना होगा कांग्रेस किस तरह से हमलावर होती है और मोहन सरकार कैसे पलटवार करती है।

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