MP के इस कलेक्टर पर भड़के मुख्य सचिव, बोले - पहले सवाल सुनो, फिर जवाब दो

Edited By Himansh sharma, Updated: 26 Jun, 2026 12:45 PM

mp chief secretary rebukes collector over response

मध्य प्रदेश सरकार की प्रशासनिक व्यवस्था को लेकर गुरुवार को हुई कलेक्टर-कमिश्नर कॉन्फ्रेंस में मुख्य सचिव अनुराग जैन का सख्त तेवर देखने को मिला।

भोपाल। मध्य प्रदेश सरकार की प्रशासनिक व्यवस्था को लेकर गुरुवार को हुई कलेक्टर-कमिश्नर कॉन्फ्रेंस में मुख्य सचिव अनुराग जैन का सख्त तेवर देखने को मिला। वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के दौरान जब अधिकारियों से विभिन्न योजनाओं और कानून व्यवस्था को लेकर जवाब-तलब किया गया, तब कई जिलों के अधिकारी संतोषजनक जवाब नहीं दे सके। इसी दौरान इंदौर कलेक्टर शिवम वर्मा के जवाब से असंतुष्ट मुख्य सचिव अनुराग जैन ने बीच बैठक में ही उन्हें टोकते हुए कहा, पहले सवाल सुनो, फिर जवाब दो। जो पूछा जा रहा है, उसी का सटीक जवाब दीजिए।

बैठक में स्वास्थ्य, शिक्षा, कानून व्यवस्था, भूमि अधिग्रहण, अवैध उत्खनन, ई-साक्ष्य, ड्रग मुक्त अभियान और नगरीय व्यवस्थाओं समेत 25 महत्वपूर्ण बिंदुओं पर समीक्षा की गई। स्वास्थ्य विभाग की समीक्षा के दौरान सामने आया कि भोपाल, सिंगरौली और इंदौर जैसे बड़े जिले एनीमिया से पीड़ित गर्भवती महिलाओं के उपचार में प्रदेश में सबसे पीछे हैं। इंदौर में केवल 27 प्रतिशत, सिंगरौली में 26 प्रतिशत और भोपाल में महज 25 प्रतिशत महिलाओं का ही बेहतर इलाज हो पाया।

इसी दौरान स्वास्थ्य एवं चिकित्सा शिक्षा विभाग के अपर मुख्य सचिव अशोक बर्णवाल ने इंदौर कलेक्टर शिवम वर्मा से सवाल किया कि शेष महिलाओं का उपचार क्यों नहीं हो सका और क्या कठिनाई रही। कलेक्टर ने सीधे जवाब देने के बजाय प्रक्रियात्मक बातें बतानी शुरू कर दीं। इस पर मुख्य सचिव अनुराग जैन ने नाराजगी जताते हुए स्पष्ट कहा कि अधिकारी सवाल को ध्यान से सुनें और उसी के अनुरूप जवाब दें। बैठक में कानून व्यवस्था की समीक्षा के दौरान रीवा जिला तय समय सीमा में चालान पेश करने के मामले में सबसे पिछड़ा पाया गया। इस पर मुख्य सचिव ने रीवा के पुलिस अधीक्षक डॉ. गुरुकरण सिंह से कहा कि 60 और 90 दिन की समय सीमा के भीतर हर हाल में चालान न्यायालय में प्रस्तुत किए जाएं। उन्होंने स्पष्ट चेतावनी दी कि इस प्रकार की लापरवाही किसी भी स्तर पर स्वीकार नहीं की जाएगी।

शिक्षा विभाग की समीक्षा में राजधानी भोपाल की स्थिति भी चिंता का विषय रही। स्कूलों में बच्चों के नामांकन और ड्रॉपआउट रोकने के मामले में भोपाल जिला सबसे पीछे पाया गया। मुख्य सचिव ने कलेक्टर प्रियंक मिश्रा से इसका कारण पूछा और जल्द सुधारात्मक कदम उठाने के निर्देश दिए। समीक्षा में सामने आया कि इस श्रेणी में भोपाल केवल 47 प्रतिशत लक्ष्य ही पूरा कर सका है, जबकि भोपाल संभाग का औसत प्रदर्शन भी मात्र 63 प्रतिशत रहा।

बैठक में नगरीय विकास विभाग ने दतिया जिले में लगातार बढ़ रहे डॉग बाइट मामलों पर भी सवाल उठाए। अपर मुख्य सचिव संजय दुबे ने दतिया कलेक्टर से विस्तृत जानकारी ली। अधिकारियों के अनुसार कलेक्टर ने इस विषय पर तथ्यात्मक और संतोषजनक जवाब प्रस्तुत किए।

समीक्षा बैठक के अंत में मुख्य सचिव अनुराग जैन ने सभी जिलों के कलेक्टरों, संभागायुक्तों और पुलिस अधिकारियों को स्पष्ट निर्देश दिए कि भूमि अधिग्रहण के लंबित मामलों का शीघ्र निपटारा किया जाए, पांडुलिपियों के डिजिटलीकरण का कार्य समय पर पूरा हो, अवैध उत्खनन पर सख्त कार्रवाई की जाए, ई-साक्ष्य संग्रहण को प्राथमिकता दी जाए, ड्रग मुक्त मध्य प्रदेश अभियान को प्रभावी बनाया जाए तथा शिक्षा और स्वास्थ्य से जुड़ी योजनाओं में किसी प्रकार की लापरवाही न बरती जाए। मुख्य सचिव ने साफ शब्दों में कहा कि जिन जिलों का प्रदर्शन कमजोर है, उनके लिए नई समय-सीमा तय की जाएगी और अगली समीक्षा में परिणाम दिखाई देने चाहिए।

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