बोर्ड परीक्षा के बीच 1200 शिक्षक सीएम कार्यक्रम में लगाए गए, कांग्रेस का आरोप - तुगलकी फरमान”, रात के अंधेरे में IAS ट्रांसफर पर सवाल

Edited By Himansh sharma, Updated: 14 Feb, 2026 02:12 PM

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मध्यप्रदेश में प्रशासनिक आदेश को लेकर सियासत तेज हो गई है। कांग्रेस ने सरकार पर बड़ा हमला बोला है।

भोपाल। मध्यप्रदेश में प्रशासनिक आदेश को लेकर सियासत तेज हो गई है। कांग्रेस ने सरकार पर बड़ा हमला बोला है। आरोप है कि बोर्ड परीक्षाओं के बीच करीब 1200 शिक्षकों, प्राचार्यों और स्कूल कर्मचारियों को मुख्यमंत्री कार्यक्रम की भीड़ प्रबंधन और पंडाल व्यवस्था में तैनात कर दिया गया। कांग्रेस ने इसे शिक्षा व्यवस्था के साथ खिलवाड़ बताते हुए कहा कि इससे विद्यार्थियों की पढ़ाई और सुरक्षा दोनों पर सीधा असर पड़ेगा। प्रदेश कांग्रेस विचार विभाग अध्यक्ष भूपेन्द्र गुप्ता ने इस आदेश को “तुगलकी फरमान” करार देते हुए कहा कि जब बच्चों की परीक्षाएं चल रही हैं, तब शिक्षकों को मंच और पंडाल संभालने में लगाना पूरी तरह गलत है। उन्होंने मांग की कि ऐसे आदेश देने वाले अधिकारियों पर कार्रवाई हो और भविष्य में शिक्षा व्यवस्था को बाधित किए बिना ही किसी भी सरकारी कार्यक्रम की व्यवस्थाएं की जाएं।

बुरहानपुर जिले में प्रस्तावित मुख्यमंत्री दौरे को लेकर नेहरू स्टेडियम में ‘भीड़ प्रबंधन और बैठक व्यवस्था’ के लिए बड़ी संख्या में शिक्षकों और स्कूल स्टाफ की ड्यूटी लगाए जाने के आदेश पर कांग्रेस ने कड़ा ऐतराज जताया है। पार्टी का कहना है कि एक साथ इतने कर्मचारियों को स्कूलों और छात्रावासों से हटाने से बच्चों की पढ़ाई, अनुशासन और सुरक्षा प्रभावित होगी। कांग्रेस ने चेतावनी दी है कि यदि परीक्षा के दौरान शिक्षकों की ड्यूटी कार्यक्रमों में लगाई गई, तो पार्टी सड़क पर उतरकर विरोध करेगी। साथ ही प्रशासन से वैकल्पिक मानव संसाधन लगाने की मांग की गई है, ताकि शिक्षा व्यवस्था बाधित न हो।

इधर, देर रात जारी हुए IAS तबादलों पर भी विपक्ष ने सवाल खड़े किए हैं। पूर्व मंत्री पीसी शर्मा ने कहा कि “दिन में ट्रांसफर क्यों नहीं होते? आधी रात को आदेश जारी करने से संदेह पैदा होता है। प्रदेश में सब कुछ ठीक नहीं चल रहा।” उन्होंने इसे सरकार की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल बताया। महाशिवरात्रि को लेकर भी कांग्रेस ने वीआईपी कल्चर पर निशाना साधा है। नेताओं ने अपील की है कि वीआईपी और वीवीआईपी दर्शन के लिए आम श्रद्धालुओं की तरह लाइन में लगें, ताकि भीड़ और भगदड़ जैसे हालात न बनें। उनका कहना है कि मंदिरों में विशेष व्यवस्था के नाम पर आम लोगों को परेशान करना गलत है।

कुल मिलाकर, प्रशासनिक आदेशों से लेकर रात के ट्रांसफर और मंदिरों में वीआईपी कल्चर तक—प्रदेश की राजनीति एक बार फिर गरमा गई है और आने वाले दिनों में इस मुद्दे पर सियासी घमासान और तेज होने के संकेत हैं।

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