Edited By Himansh sharma, Updated: 02 Sep, 2026 02:18 PM

दतिया विधानसभा उपचुनाव में भाजपा को मिली हार के बाद पार्टी के भीतर शुरू हुई राजनीतिक हलचल अब भी थमती नजर नहीं आ रही है।
भोपाल। दतिया विधानसभा उपचुनाव में भाजपा को मिली हार के बाद पार्टी के भीतर शुरू हुई राजनीतिक हलचल अब भी थमती नजर नहीं आ रही है। सबसे ज्यादा चर्चा पूर्व गृह मंत्री और भाजपा के वरिष्ठ नेता नरोत्तम मिश्रा की अगली भूमिका को लेकर है। भोपाल से लेकर दिल्ली तक इस मुद्दे पर संगठन स्तर पर मंथन जारी बताया जा रहा है, लेकिन अब तक उनकी जिम्मेदारी को लेकर कोई अंतिम तस्वीर सामने नहीं आई है। इसी बीच भाजपा के क्षेत्रीय संगठन महामंत्री अजय जामवाल का नरोत्तम मिश्रा के आवास पर पहुंचना सियासी तौर पर अहम माना जा रहा है। जामवाल के अलावा प्रदेश सरकार के कैबिनेट मंत्री कैलाश विजयवर्गीय ने भी मिश्रा से मुलाकात की। दोनों नेताओं की मुलाकात अलग-अलग समय पर हुई।
उपचुनाव की हार के बाद बढ़ी चर्चा
दतिया उपचुनाव के दौरान भाजपा ने नरोत्तम मिश्रा को टिकट नहीं दिया था। टिकट कटने के बाद उनके समर्थकों में नाराजगी खुलकर सामने आई थी और भाजपा कार्यालय के घेराव तक की स्थिति बन गई थी। प्रदर्शनकारियों को नियंत्रित करने के लिए पुलिस को हस्तक्षेप करना पड़ा था। उपचुनाव में भाजपा प्रत्याशी की हार के बाद पार्टी के भीतर इस फैसले और चुनावी रणनीति को लेकर भी सवाल उठे। इसी पूरे घटनाक्रम में नरोत्तम मिश्रा की भूमिका को लेकर संगठन के स्तर पर चर्चा तेज हो गई।
खुद के लिए जिम्मेदारी चाहते हैं मिश्रा?
राजनीतिक सूत्रों के अनुसार, नरोत्तम मिश्रा पार्टी नेतृत्व के सामने अपनी स्थिति और दतिया चुनाव से जुड़े घटनाक्रम पर अपना पक्ष रख चुके हैं। साथ ही उन्होंने संगठन में अपनी राजनीतिक सक्रियता को देखते हुए आगे कोई महत्वपूर्ण जिम्मेदारी दिए जाने की इच्छा भी जाहिर की है। हालांकि, उनकी अगली भूमिका को लेकर अभी भाजपा के केंद्रीय नेतृत्व की ओर से स्थिति स्पष्ट नहीं हुई है। यही वजह है कि प्रदेश भाजपा के नेताओं की नजर भी दिल्ली के अगले फैसले पर टिकी हुई है।
कई बड़े नेताओं के समर्थन की चर्चा
सूत्रों का दावा है कि नरोत्तम मिश्रा के राजनीतिक भविष्य को लेकर भाजपा के कुछ वरिष्ठ नेता उनके पक्ष में खड़े नजर आ सकते हैं। पार्टी के भीतर यह राय भी सामने आ रही है कि लंबे समय से सक्रिय रहे वरिष्ठ नेता की भूमिका को लेकर जल्द स्थिति स्पष्ट होनी चाहिए।
इसी बीच जामवाल की मुलाकात ने चर्चाओं को और हवा दे दी है। बताया जा रहा है कि नरोत्तम मिश्रा ने अजय जामवाल को मुलाकात के लिए आमंत्रित किया था। वहीं कैलाश विजयवर्गीय भी उनसे मिलने उनके निवास पहुंचे।
जामवाल की पहली अहम मुलाकात
दतिया उपचुनाव के परिणाम के बाद अजय जामवाल और नरोत्तम मिश्रा की यह मुलाकात खास मानी जा रही है। मुलाकात को लेकर भाजपा की ओर से किसी बड़े राजनीतिक निर्णय या संदेश की पुष्टि नहीं हुई है, लेकिन पार्टी के अंदर इसे सामान्य मुलाकात से अलग नजर से देखा जा रहा है। अब निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि दिल्ली में चल रहे मंथन का नतीजा क्या निकलता है और नरोत्तम मिश्रा को संगठन में कोई नई जिम्मेदारी मिलती है या नहीं। फिलहाल उनकी अगली राजनीतिक भूमिका भाजपा के भीतर सबसे चर्चित सवालों में बनी हुई है।