Edited By Desh sharma, Updated: 09 Jan, 2026 08:51 PM

इंदौर के भागीरथपुरा में दूषित पानी से हुई मौतों को लेकर प्रदेश से लेकर देश में हाहाकार मचा हुआ है। विरोधी सरकार पर लापरवाही बरतने को लेकर लगातार कोस रहे हैं और बीजेपी के खिलाफ प्रदर्शन कर रहे हैं। अफसरों पर भी इस मामले में कोताही करने का आरोप है। अब...
(इंदौर): इंदौर के भागीरथपुरा में दूषित पानी से हुई मौतों को लेकर प्रदेश से लेकर देश में हाहाकार मचा हुआ है। विरोधी सरकार पर लापरवाही बरतने को लेकर लगातार कोस रहे हैं और बीजेपी के खिलाफ प्रदर्शन कर रहे हैं। अफसरों पर भी इस मामले में कोताही करने का आरोप है। अब इस केस में एमपी के कई अफसरों की मुश्किलें बढ़ सकती हैं। क्योंकि इंदौर में तैनात रहे इन अधिकारियों पर गैर इरादतन हत्या का केस दर्ज कराने के लिए जिला कोर्ट में एक याचिका दायर की गई है।
भागीरथपुरा के शख्स ने लगाई है याचिका
यह याचिका भागीरथपुरा में जहरीले पानी से हुई मौतों के मामले में इंदौर जिला अदालत में दायर की गई है। भागीरथपुरा निवासी ने जहरीले पानी से हुई मौतों के लिए संबंधित अधिकारियों को जिम्मेदार ठहराया है और इन अधिकारियों पर एफआईआर दर्ज करने के लिए याचिका लगाई है। याचिका में दलील है कि ये साफ रूप से गैर इरादतन हत्या का केस है। साथ ही आरोप लगाया गया है कि मौतों के जिम्मेदार अफसरों को सरकार ने पदोन्नत कर दिया है। इसी आधार पर कोर्ट ने पुलिस से रिपोर्ट तलब की है।
याचिकाकर्ता का आरोप है कि 2024 में एक युवती की मौत के बाद नर्मदा की पाइप लाइन बदलने के टेंडर भी जारी हो गए थे लेकिन इंदौर नगर निगम के तत्कालीन आयुक्त ने इसे दबा दिया। बाद में आयुक्त दिलीप यादव और मौजूदा कलेक्टर शिवम वर्मा ने भी टेंडर पास नहीं किया।
याचिका में जिम्मेदार अफसरों के खिलाफ गैर इरादतन हत्या का केस दर्ज करने और जांच होने तक सभी अधिकारियों को पद से हटाने की भी मांग है। इसके साथ ही याचिकाकर्ता का आरोप है कि इतने बड़े स्तर पर जान लेने वाले जिम्मेदार अधिकारियों को तो राज्य सरकार ने प्रमोट कर दिया है।
लिहाजा याचिका में इंदौर नगर निगम के तत्कालीन दोनों आयुक्त, अपर आयुक्त और जल कार्य अधीक्षक यंत्री संजीव श्रीवास्तव के खिलाफ गैर इरादतन हत्या का केस दर्ज करने की मांग की गई है। लिहाजा इस याचिका पर कोर्ट ने संबंधित थाना प्रभारी को नोटिस जारी कर जवाब मांगा गया है और बाणगंगा थाना प्रभारी को पूरे मामले की जांच करके रिपोर्ट पेश करने के आदेश हैं। गौर करने वाली बात है कि भागीरथपुरा के मामले में हाई कोर्ट के साथ ही जिला अदालत में भी याचिका लगाई गई है।