Edited By meena, Updated: 28 Apr, 2026 03:04 PM

बोरी ग्राम पंचायत में शराब दुकान खोलने को लेकर उपजा विवाद अब कानून व्यवस्था की बड़ी परीक्षा बन गया है। कलेक्टर के निर्देश पर बुलाई गई विशेष ग्रामसभा में जहां लोकतांत्रिक प्रक्रिया के तहत राय ली जानी थी...
बोरी (हेमंत पाल) : बोरी ग्राम पंचायत में शराब दुकान खोलने को लेकर उपजा विवाद अब कानून व्यवस्था की बड़ी परीक्षा बन गया है। कलेक्टर के निर्देश पर बुलाई गई विशेष ग्रामसभा में जहां लोकतांत्रिक प्रक्रिया के तहत राय ली जानी थी, वहीं पूरा घटनाक्रम हिंसा, अफरा तफरी और पुलिस की निष्क्रियता की कहानी बन गया। इस पूरे मामले के केंद्र में हैं बोरी थाना प्रभारी अनिल पटेल, जिनकी कार्यशैली पर अब ग्रामीणों से लेकर सामाजिक संगठनों तक ने गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
बहुमत विरोध में, फिर भी क्यों भड़का माहौल
ग्रामसभा में बड़ी संख्या में ग्रामीण, महिलाएं और युवा शामिल हुए। 145 ग्रामीणों ने शराब दुकान का विरोध किया सिर्फ 27 लोगों ने समर्थन दिया स्पष्ट जनमत सामने आने के बावजूद गांव में शराब दुकान खोलने की चर्चा ने माहौल को तनावपूर्ण बना दिया। लोगों का कहना है कि जब जनता की राय इतनी स्पष्ट थी, तो प्रशासन और पुलिस को स्थिति को नियंत्रित करने के लिए सक्रिय भूमिका निभानी चाहिए थी।
ग्रामसभा बनी हिंसा का अखाड़ा
इसी दौरान एक महिला के साथ खुलेआम मारपीट की घटना ने पूरे मामले को झकझोर दिया। प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार महिला अपने परिवार के सदस्य को शराब दुकान के विरोध में हस्ताक्षर करने के लिए समझा रही थी, तभी एक व्यक्ति ने बीच में हस्तक्षेप कर उसके साथ मारपीट शुरू कर दी। महिला को बुरी तरह पीटा गया और वह गंभीर रूप से घायल हो गई। मौके पर पुलिस मौजूद थी लेकिन घटना के बाद भी प्राथमिकी दर्ज नहीं की गई। यहीं से सवाल उठने लगे कि क्या पुलिस सिर्फ दर्शक बनकर रह गई।

थाना प्रभारी की भूमिका पर सवाल
ग्रामीणों और प्रत्यक्षदर्शियों का आरोप है कि थाना प्रभारी अनिल पटेल ने घटना के बाद भी कोई ठोस कार्रवाई नहीं की। क्षेत्र में लंबे समय से यह भी आरोप लगते रहे हैं कि अवैध शराब का कारोबार खुलेआम चल रहा है। गांजा और अन्य नशीले पदार्थों की बिक्री बढ़ रही है। मारपीट और विवाद के मामलों में समय पर प्राथमिकी दर्ज नहीं होती
ऐसे में ग्रामसभा की घटना ने इन आरोपों को और मजबूत कर दिया है।
जवाब से बचते थाना प्रभारी
इस गंभीर मामले में जब मीडिया ने थाना प्रभारी अनिल पटेल से पक्ष जानना चाहा, तो उन्होंने संवाद से बचते हुए पत्रकार का नंबर ही ब्लॉक कर दिया। यह घटना न केवल पारदर्शिता की कमी को दर्शाती है, बल्कि यह भी सवाल उठाती है कि क्या जिम्मेदार अधिकारी जवाबदेही से बच रहे हैं। जिले के पुलिस अधीक्षक विजय अग्रवाल को सख्त पुलिसिंग के लिए जाना जाता है, लेकिन बोरी की यह घटना उनके नेतृत्व पर भी सवाल खड़े कर रही है।
- क्या स्थानीय स्तर पर मिल रही शिकायतों को नजरअंदाज किया जा रहा है
- क्या थाना स्तर की लापरवाही पर कार्रवाई नहीं हो रही
उड़ता बोरी की चर्चा तेज
स्थानीय लोगों के बीच अब उड़ता बोरी शब्द तेजी से प्रचलित हो रहा है, जो क्षेत्र में बढ़ती अवैध गतिविधियों की ओर इशारा करता है। लोगों का कहना है कि अगर पुलिस की मौजूदगी में महिला सुरक्षित नहीं है, तो आम नागरिक खुद को कैसे सुरक्षित महसूस करेगा।
जनता की मांगें
- घटना के बाद ग्रामीणों में भारी आक्रोश है और उन्होंने प्रशासन से स्पष्ट मांग की है
- महिला के साथ मारपीट करने वाले आरोपी पर तत्काल प्राथमिकी दर्ज की जाए
- गांव में प्रस्तावित शराब दुकान को पूरी तरह रद्द किया जाए
- थाना प्रभारी की कार्यप्रणाली की उच्च स्तरीय जांच हो