Edited By Himansh sharma, Updated: 02 Feb, 2026 01:59 PM

मध्य प्रदेश के भोपाल देहात एसपी रामशरण प्रजापति पर एक सब-इंस्पेक्टर ने बेहद गंभीर आरोप लगाए हैं।
भोपाल। मध्य प्रदेश के भोपाल देहात एसपी रामशरण प्रजापति पर एक सब-इंस्पेक्टर ने बेहद गंभीर आरोप लगाए हैं। सूखी सेवनिया थाने में पदस्थ एसआई केसी यादव ने आरोप लगाया है कि एसपी कार्यालय में उनके साथ गाली-गलौज की गई और विरोध करने पर धक्के देकर बाहर निकालने की धमकी दी गई। इतना ही नहीं, बाद में उनके खिलाफ झूठी विभागीय जांच शुरू करा दी गई।एसआई केसी यादव ने इस पूरे मामले को लेकर आईजी, डीजीपी, मुख्यमंत्री और मानवाधिकार आयोग को लिखित शिकायत भेजी है। शिकायत में उन्होंने यहां तक लिखा है कि यदि उन्हें न्याय नहीं मिला, तो उनकी इस शिकायत को ही सुसाइड नोट माना जाए।
रोजनामचे में दर्ज की घटना, फिर बढ़ी मुश्किलें
घटना के बाद एसआई यादव ने थाने के रोजनामचे में पूरी बात दर्ज कर दी। इसकी जानकारी मिलने पर एसपी प्रजापति ने उन्हें फोन कर दोबारा फटकार लगाई और दो अलग-अलग मामलों में विभागीय जांच शुरू करा दी।
डायरी मांगने पर भड़के SP
एसआई यादव ने शिकायत में बताया कि 14 सितंबर 2025 को एसपी ने आबकारी एक्ट के एक मामले की केस डायरी मंगाई थी। मीटिंग के बाद जब उन्होंने हाईकोर्ट में भेजने के लिए डायरी वापस मांगी, तो एसपी ने इसे गुस्ताखी मानते हुए अपशब्द कहे और डायरी एसडीओपी से लेने को कहा। एसआई यादव का कहना है कि 30 साल की सेवा में उनके साथ ऐसा दुर्व्यवहार पहली बार हुआ है। उन्होंने मानसिक रूप से टूटकर आत्महत्या तक का विचार किया, लेकिन स्टाफ और परिवार की जिम्मेदारियों के चलते कदम पीछे खींच लिया।
महिला अधिकारी भी परेशान, लेकिन डर का माहौल
शिकायत में एसआई यादव ने दावा किया है कि एसपी की प्रताड़ना से कई जूनियर अधिकारी परेशान हैं। महिला अधिकारी भी इस व्यवहार से त्रस्त हैं, लेकिन डर के कारण सामने आने की हिम्मत नहीं जुटा पा रही हैं।
उन्होंने लिखा—
पिछले चार महीनों में मुझे इस कदर प्रताड़ित किया गया कि अब दो ही रास्ते बचे हैं—या तो न्याय मांगूं या फिर आत्महत्या कर लूं।
पहले भी विवादों में रहे हैं SP
यह पहला मौका नहीं है जब एसपी रामशरण प्रजापति विवादों में आए हों। नवंबर 2025 में उन्होंने भोपाल देहात के एक थाना प्रभारी आशीष सप्रे को लाइन अटैच करने का आदेश दिया था, जिसे कुछ ही घंटों बाद निरस्त कर दिया गया। बताया गया था कि पशु मेले को शिफ्ट कराने के दौरान व्यापारियों से बदसलूकी के आरोपों के चलते यह कार्रवाई की गई थी। आदेश के बाद टीआई और एसपी के बीच तीखी बहस की भी चर्चा रही थी। बाद में हिंदू संगठनों के विरोध के बीच लाइन अटैच का आदेश वापस ले लिया गया।