Edited By Vikas Tiwari, Updated: 12 Feb, 2026 03:34 PM

मंडला जिले के नैनपुर रेलवे स्टेशन पर उस वक्त अफरा-तफरी जैसा माहौल बन गया, जब अचानक सायरन गूंजने लगे, जवान दौड़ते नजर आए और स्ट्रेचर पर घायलों को ले जाया जाने लगा। कुछ देर के लिए स्टेशन का दृश्य किसी हमले के बाद की स्थिति जैसा लग रहा था। हालांकि, यह...
मंडला (अरविंद सोनी): मंडला जिले के नैनपुर रेलवे स्टेशन पर उस वक्त अफरा-तफरी जैसा माहौल बन गया, जब अचानक सायरन गूंजने लगे, जवान दौड़ते नजर आए और स्ट्रेचर पर घायलों को ले जाया जाने लगा। कुछ देर के लिए स्टेशन का दृश्य किसी हमले के बाद की स्थिति जैसा लग रहा था। हालांकि, यह कोई वास्तविक घटना नहीं थी, बल्कि सुरक्षा एजेंसियों की सतर्कता और तैयारी का बड़ा प्रदर्शन था।

रेलवे और राष्ट्रीय आपदा मोचन बल (NDRF) द्वारा संयुक्त रूप से यहां एक व्यापक मॉक ड्रिल आयोजित की गई। इस अभ्यास का उद्देश्य संभावित आतंकी हमले, बम विस्फोट या वीवीआईपी अपहरण जैसी आपात स्थितियों में सुरक्षा एजेंसियों की तत्परता और समन्वय को परखना था। मॉक ड्रिल के दौरान बम निरोधक दस्ते ने संदिग्ध वस्तु की गहन जांच की। वहीं, एनडीआरएफ की टीमों ने विस्फोट के बाद की आपात स्थिति को ध्यान में रखते हुए घायलों को सुरक्षित निकालने और प्राथमिक उपचार देने का अभ्यास किया। स्ट्रेचर पर घायलों को ले जाया गया और स्वास्थ्य विभाग की टीमों ने आपातकालीन चिकित्सा प्रतिक्रिया का प्रदर्शन किया।
इस संयुक्त अभ्यास में एनडीआरएफ, रेलवे सुरक्षा बल (RPF), जीआरपी, स्थानीय पुलिस और स्वास्थ्य विभाग की सक्रिय भागीदारी रही। हर एजेंसी ने अपनी भूमिका का बारीकी से निर्वहन किया, ताकि किसी भी वास्तविक संकट की स्थिति में प्रतिक्रिया तेज, संगठित और प्रभावी हो। नैनपुर एक महत्वपूर्ण रेलवे जंक्शन है, जहां प्रतिदिन बड़ी संख्या में यात्रियों का आवागमन होता है। ऐसे में इस तरह की मॉक ड्रिल को सुरक्षा व्यवस्था मजबूत करने की दिशा में अहम कदम माना जा रहा है। अधिकारियों का कहना है कि चाहे खतरा प्राकृतिक हो या मानवजनित, मजबूत तैयारी ही सबसे बड़ा बचाव है। नैनपुर की यह मॉक ड्रिल इसी सतर्कता और सजगता का संकेत है।