Edited By Vikas Tiwari, Updated: 09 Feb, 2026 02:38 PM

कबीरधाम जिले के मुख्यालय कवर्धा में जिस तेजी से देह व्यापार की जड़ें फैल रही हैं, वह अब सिर्फ कानून-व्यवस्था का मामला नहीं रह गया है, बल्कि एक गंभीर सामाजिक आपातकाल का रूप ले चुका है। शहर के भीतर यह अवैध धंधा अब गलियों तक सीमित न रहकर लॉज, होटल और...
कवर्धा: कबीरधाम जिले के मुख्यालय कवर्धा में जिस तेजी से देह व्यापार की जड़ें फैल रही हैं, वह अब सिर्फ कानून-व्यवस्था का मामला नहीं रह गया है, बल्कि एक गंभीर सामाजिक आपातकाल का रूप ले चुका है। शहर के भीतर यह अवैध धंधा अब गलियों तक सीमित न रहकर लॉज, होटल और रिहायशी इलाकों तक पहुंच चुका है।
स्थिति यह है कि कवर्धा की पहचान अब उद्योग, संस्कृति या विकास से कम और देह व्यापार से जुड़ी सुर्खियों से ज्यादा होने लगी है। यह न केवल प्रशासन के लिए चेतावनी है, बल्कि पूरे समाज के लिए भी शर्मनाक स्थिति है। शहर के कई लॉज अब यात्रियों के ठहरने के लिए नहीं, बल्कि घंटे के हिसाब से शरीर की खरीद-फरोख्त के लिए संचालित हो रहे हैं। यह एक ऐसा खुला सच बन चुका है, जिसे हर कोई जानता है, लेकिन रोकने में व्यवस्था नाकाम नजर आ रही है।
बस स्टैण्ड, ठाकुरदेव चौक, घोठिया मार्ग, साधना नगर, राजनांदगांव–रायपुर बायपास, लालपुर रोड और समनापुर रोड अब सिर्फ रास्ते नहीं रह गए हैं, बल्कि वे इलाके बन चुके हैं जहां दिनभर संदिग्ध लड़के-लड़कियों की आवाजाही आम बात हो गई है। स्थानीय लोगों का कहना है कि कुछ लॉजों में पहचान पत्र सिर्फ लड़कों से लिया जाता है, लड़कियों से नहीं। वहां नियम नहीं, केवल पैसे चलते हैं। 500 रुपए प्रति घंटे से शुरू होने वाले कमरों का किराया इस बात का साफ संकेत है कि यह कोई इक्का-दुक्का घटना नहीं, बल्कि संगठित और व्यावसायिक देह व्यापार का जाल है।
ऐसे लॉजों के काउंटर पर न कानून की परवाह है, न नैतिकता की। यहां कैश ही सब कुछ है और दलालों का बोलबाला है। सवाल यह है कि प्रशासन की आंखों के सामने फल-फूल रहे इस अवैध धंधे पर कब और कैसे लगाम लगेगी। शहर की सामाजिक छवि और युवाओं के भविष्य पर मंडरा रहे इस खतरे ने अब कड़े और तत्काल कदमों की जरूरत को और भी गंभीर बना दिया है।