अचानक क्यों पश्चिम से पूर्व की ओर बहने लगी ताप्ती नदी...बेहद रोचक है पिता-पुत्री से जुड़ी कहानी

Edited By meena, Updated: 14 Jan, 2026 08:19 PM

why did the tapti river suddenly start flowing from west to east

भगवान सूर्य नारायण एवं छाया की पुत्री ताप्ती यूं तो पश्चिम मुखी नदियों में शामिल है, लेकिन बैतूल जिले में अग्रितोड़ा नामक स्थान पर ताप्ती अचानक पश्चिम से पूर्व की ओर बहने लगती है...

बैतूल (रामकिशोर पवार)  : भगवान सूर्य नारायण एवं छाया की पुत्री ताप्ती यूं तो पश्चिम मुखी नदियों में शामिल है, लेकिन बैतूल जिले में अग्रितोड़ा नामक स्थान पर ताप्ती अचानक पश्चिम से पूर्व की ओर बहने लगती है। इस स्थान को सूरजमुखी - सूर्यमुखी एवं पूर्व मुखी भी कहा जाता है।

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ताप्ती नदी की मुख्य धारा पूर्व से पश्चिम की ओर बहती है न कि पूर्व की ओर लेकिन मकर संक्राति के दिन जब सूर्यदेव दक्षिणयाण से उतरायण की ओर अपने रथ पर निकल पड़ते है ऐसे समय में अपने पिता को उतरायण होते देख ताप्ती की धारा पूर्व की ओर बहने लगती है। ताप्ती भारत की उन प्रमुख पवित्र नदियों में से एक है जो सामान्य पूर्व प्रवाह के विपरीत पश्चिम की ओर बहती हैं। ताप्ती नदी पूर्व से निकलकर पश्चिम दिशा की ओर बहती है। ताप्ती मध्य प्रदेश के बैतूल जिले में मुलताई (मूल तापी) नामक स्थान से होता है।

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भारत के तीन राज्यों मध्यप्रदेश - महाराष्ट्र - गुजरात राज्यों से होकर लगभग 750 किलोमीटर की यात्रा करती है। ताप्ती देश दुनिया की एकलौती नदी है जो कि अपने प्रवाह क्षेत्र में बोरीक्रास नामक स्थान पर ओंमकार, की आकृति निर्मित करती है। ताप्ती नदी नंगी आंखों से दिखाई देने वाले त्रिवेणी संगमो का निर्माण करती है। पहला संगम पौनी गौला नामक स्थान पर श्रवण तीर्थ है जहां पर एक ओर से तवा और दूसरी ओर अम्भोरा नदी आकर मिलती है।

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इसी तरह जलगांव जिले में ताप्ती नदी में जहां एक ओर से आनेर दूसरी ओर बोरी नदी आकर मिलती है। तीन नदियों का संगम भगवान शिव के त्रिशूल का निमार्ण करता है। तीसरा त्रिवेणी संगम संगम जलगांव जिले में रामेश्वर नामक तीर्थ स्थान पर भी गिरना और पांजरा नदी त्रिवेणी संगम का प्रतिक रूप त्रिवेणी घाट है।

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