Edited By Himansh sharma, Updated: 04 Jun, 2026 11:19 AM

मध्य प्रदेश में 18 जून को होने वाले राज्यसभा चुनाव को लेकर राजनीतिक सरगर्मियां अपने चरम पर पहुंच गई हैं।
भोपाल। मध्य प्रदेश में 18 जून को होने वाले राज्यसभा चुनाव को लेकर राजनीतिक सरगर्मियां अपने चरम पर पहुंच गई हैं। भारतीय जनता पार्टी ने उम्मीदवारों के चयन की प्रक्रिया लगभग अंतिम चरण में पहुंचा दी है। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव का दिल्ली दौरा और राष्ट्रीय नेतृत्व के साथ हुई महत्वपूर्ण बैठकें इस बात के संकेत दे रही हैं कि पार्टी जल्द ही अपने पत्ते खोल सकती है।सूत्रों के अनुसार, मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव और प्रदेश संगठन के वरिष्ठ नेताओं ने दिल्ली में भाजपा के शीर्ष नेतृत्व के साथ राज्यसभा उम्मीदवारों के नामों पर विस्तृत चर्चा की। बैठक में प्रदेश के राजनीतिक और सामाजिक समीकरणों के साथ-साथ आगामी चुनावी रणनीति को भी ध्यान में रखा गया। बताया जा रहा है कि संभावित नामों पर लगभग सहमति बन चुकी है और अब केवल औपचारिक घोषणा शेष है।राजनीतिक गलियारों में चर्चा है कि भाजपा इस बार भी सामाजिक संतुलन, क्षेत्रीय प्रतिनिधित्व और संगठनात्मक योगदान को प्राथमिकता देते हुए कुछ नए चेहरों पर दांव लगा सकती है। यही वजह है कि संभावित उम्मीदवारों को लेकर अटकलों का दौर लगातार जारी है।
एक-दो दिन में हो सकता है बड़ा ऐलान
18 जून को होने वाले मतदान को देखते हुए भाजपा नेतृत्व जल्द ही उम्मीदवारों की सूची जारी कर सकता है। पार्टी के भीतर अंतिम स्तर पर रणनीतिक मंथन चल रहा है। माना जा रहा है कि अगले 24 से 48 घंटों में तस्वीर पूरी तरह साफ हो सकती है।
क्या कांग्रेस की रणनीति पर भी नजर?
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि भाजपा कांग्रेस की संभावित रणनीति पर भी नजर बनाए हुए है। कांग्रेस किस चेहरे को मैदान में उतारती है, इसका असर भाजपा के अंतिम निर्णय पर पड़ सकता है। हालांकि संख्या बल के आधार पर चुनावी गणित लगभग स्पष्ट है, फिर भी राजनीतिक दल कोई जोखिम लेने के मूड में नहीं दिखाई दे रहे हैं।
सीटों का गणित भाजपा के पक्ष में
मध्य प्रदेश विधानसभा में वर्तमान संख्या बल के आधार पर राज्यसभा की तीन सीटों में से दो सीटों पर भाजपा और एक सीट पर कांग्रेस की जीत लगभग तय मानी जा रही है। विधानसभा की 230 सदस्यीय ताकत में भाजपा के पास 164 विधायक हैं, जबकि कांग्रेस के खाते में 64 विधायक हैं। एक विधायक भारत आदिवासी पार्टी का है और एक सीट रिक्त है।राज्यसभा की एक सीट जीतने के लिए 58 मतों की आवश्यकता होती है। ऐसे में भाजपा दो सीटों पर आसानी से जीत दर्ज कर सकती है, जबकि कांग्रेस के पास भी एक सीट निकालने के लिए पर्याप्त संख्या बल मौजूद है।
अब सबकी निगाहें उम्मीदवारों पर
राजनीतिक समीकरण भले ही स्पष्ट हों, लेकिन सबसे बड़ा सवाल अभी भी यही है कि भाजपा और कांग्रेस अपने-अपने उम्मीदवारों के रूप में किन चेहरों को मैदान में उतारती हैं। दिल्ली में हुए मंथन के बाद अब प्रदेश की राजनीति की नजरें केवल उस सूची पर टिकी हैं, जो आने वाले एक-दो दिनों में जारी हो सकती है। राज्यसभा चुनाव भले ही संख्या बल के हिसाब से तय नजर आ रहा हो, लेकिन उम्मीदवारों का चयन भविष्य की राजनीति के कई संकेत भी देगा।