छत्तीसगढ़ में जल विद्युत की बड़ी छलांग! 8300 मेगावाट PSP प्रोजेक्ट्स के लिए NHPC-NTPC समेत बड़ी कंपनियों से MOU, 6 जिलों में फास्ट ट्रैक पर काम शुरू

Edited By Himansh sharma, Updated: 13 Feb, 2026 07:56 PM

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छत्तीसगढ़ में पंप स्टोरेज आधारित जल विद्युत परियोजनाएं स्थापित करने के लिए बहुत बड़े पैमाने पर प्रयास किए जा रहे हैं

रायपुर। छत्तीसगढ़ में पंप स्टोरेज आधारित जल विद्युत परियोजनाएं स्थापित करने के लिए बहुत बड़े पैमाने पर प्रयास किए जा रहे हैं जिसके अंतर्गत अभी तक प्रस्तावित 8300 मेगावाट क्षमता की कुल 28 इकाइयां स्थापित करने के लिए विभिन्न संस्थाओं के साथ छत्तीसगढ़ स्टेट पॉवर जनरेशन कंपनी द्वारा एमओयू किये गये हैं। प्रदेश में अन्य स्थानों पर भी संभावनाओं का पता लगाया जा रहा है।

छत्तीसगढ़ में कोयला खदानों की अधिकता के कारण यहां प्राप्त विद्युत गृहों की अधिकता रही है। फिलहाल राज्य में ताप विद्युत परियोजनाओं के मुकाबले जल विद्युत परियोजनाएं नगण्य हैं। वर्तमान परिस्थितियों में बड़े बांधों के निर्माण में आने वाली जटिलताओं को देखते हुए नए जल बिजलीघर स्थापित करना एक बड़ी चुनौती है। ऐसे में पंप स्टोरेज आधारित जल विद्युत परियोजनाएं एक बेहतर विकल्प मानी गई हैं। इन परियोजनाओं में बांध के पानी को ऊपर खींच कर रखने के लिए वृहद टंकीनुमा संरचना तैयार की जाती है। बांध से अपलिफ्ट किया गया पानी छोड़ कर टरबाइन चलाई जाती है। यह पानी नीचे से ऊपर और ऊपर से नीचे सरकुलेट होने के कारण बांध में पानी की क्षति नहीं होती। इस तरह यह परियोजना पर्यावरण सम्मत भी है जिसे जल विद्युत क्षमता बढ़ाने का बेहतर विकल्प माना गया है। छत्तीसगढ़ में इस परियोजना के लिए 6 स्थानों का चयन किया गया है जहां पी.एस.पी. (पंप स्टोरेज प्लांट) हाइड्रो प्रोजेक्ट स्थापित करने के लिए भारत सरकार के उपक्रमों एन.एच.पी.सी., एन.टी.पी.सी., टी.एच.डी.सी., एस.जे.वी.एन. जैसी देश की सार्वजनिक क्षेत्र की संस्थाओं के साथ एमओयू किये गये हैं।

इन चिन्हांकित परियोजना स्थलों में हसदेव बांगो जिला कोरबा (800 मेगावाट), सिकासेर जिला गरियाबंद (1200 मेगावाट), दनगरी जिला जशपुर (1400 मेगावाट), कोटपाली जिला बलरामपुर (1800 मेगावाट), रौनी जिला जशपुर (2100 मेगावाट) तथा कुरूंद जिला गरियाबंद (1000 मेगावाट) क्षमता के पी.एस.पी. स्थापित किया जाना प्रस्तावित है।  

यहां विभिन्न संस्थाओं के साथ सीएसपीजीसीएल ने एमओयू किये है। डीपीआर निर्माण, संयुक्त उपक्रम एग्रीमेंट जैसी प्रारंभिक कार्यवाहियां प्रचलन में हैं। इसके अतिरिक्त अन्य स्थानों पर भी संभावनाओं का पता लगाया जा रहा है।

मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने इन परियोजनाओं का प्रारंभिक कार्य तेजी से आगे बढ़ाने के निर्देश दिये हैं। प्रदेश के ऊर्जा सचिव तथा सीएसपीजीसीएल के अध्यक्ष डॉ.रोहित यादव इनकी प्रगति की नियमित समीक्षा कर रहे हैं ताकि हर प्रक्रिया निर्धारित समय में पूर्ण की जा सकें। सीएसपीजीसीएल के प्रबंध निदेशक एस.के.कटियार  ने संपूर्ण अमले को इन परियोजनाओं की प्रगति के लिए संवेदनशील बनाते हुए समस्त गतिविधियां फास्ट ट्रेक में करने के निर्देश दिये हैं। इन परियोजनाओं का क्रियान्यवन होने पर छत्तीसगढ़ पंप स्टोरेज आधारित जल विद्युत परियोजनाओं की स्थापना वाला देश का अव्वल राज्य बन जायेगा।

बिजली भंडारण और पीक ऑवर में कम लागत पर बिजली प्राप्त करने की सुविधा

पम्प स्टोरेज आधारित जल विद्युत परियोजना विशाल मात्रा में स्वच्छ ऊर्जा भंडारण करने का एक परिपक़्व तकनीक है जो बिजली ग्रिड की स्थिरता एवं विश्वनीयता के लिए आदर्श है। इसमें पानी के दो जलाशय, एक नीचे और दूसरा ऊपर बनाया जाता है। पंप स्टोरेज हाइड्रो प्लांट द्वारा ऑफ पीक डिमांड (कम लागत) पर पानी को नीचे वाले जलाशय से टरबाईन को पंपिंग मोड में चलाकर ऊपर वाले जलाशय पर पंप किया जाता है तथा जल को ऊपरी जलाशय में भंडारित कर गुरूत्वाकर्षण के विरूद्ध जल के स्थितिज ऊर्जा को संचयित किया जाता है एवं पीक डिमांड में जब बिजली की कीमतें उच्चतम होती है उस अवधि में उच्च जलाशय में भंडारित जल को जल वाहक पाईपों के द्वारा गुरूत्वाकर्षण के अनुकूल नीचे के जलाशय में प्रवाहित कर टरबाईन के माध्यम से (टरबाईन मोड में चलाकर) ऊर्जा का उत्पादन किया जाता है।

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