BJP में बड़ा बवाल! विवादित नेताओं को पद मिलते ही मची खलबली, घंटों में डिलीट हुई जिला कार्यकारिणी सूची

Edited By Himansh sharma, Updated: 11 Feb, 2026 01:20 PM

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मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल में भाजपा की नई जिला कार्यकारिणी की घोषणा होते ही सियासी हलचल तेज हो गई।

भोपाल: मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल में भाजपा की नई जिला कार्यकारिणी की घोषणा होते ही सियासी हलचल तेज हो गई। शहर अध्यक्ष रविंद्र यती द्वारा मंगलवार को जारी की गई टीम को पार्टी के भीतर ही तीखे विरोध का सामना करना पड़ा। हालात ऐसे बने कि कुछ ही घंटों के भीतर पूरी सूची को होल्ड पर रख दिया गया और सोशल मीडिया से पोस्ट डिलीट कर दिए गए।

विवाद की जड़ क्या है?

सबसे ज्यादा आपत्ति जिला महामंत्री पद पर सचिन दास बब्बा की नियुक्ति को लेकर जताई गई। पार्टी के वरिष्ठ नेताओं और कार्यकर्ताओं का आरोप है कि सचिन दास वर्ष 2013 में भाजपा के अधिकृत प्रत्याशी सुरेंद्र नाथ सिंह के खिलाफ निर्दलीय चुनाव लड़ चुके हैं। इसके अलावा उन पर प्रदेश कार्यालय में तोड़फोड़ जैसे गंभीर आरोप भी लगाए जाते रहे हैं। ऐसे में उन्हें संगठन के अहम पद पर जिम्मेदारी देना कई कार्यकर्ताओं को नागवार गुजरा।

पार्षदों का क्लब बनने का आरोप

नई कार्यकारिणी में पार्षदों और उनके प्रतिनिधियों को प्रमुखता दिए जाने पर भी संगठन के भीतर असंतोष देखा गया। वार्ड 70 के पार्षद अशोक वाणी, वार्ड 32 के पार्षद प्रतिनिधि राजू अनेजा, वार्ड 45 के पार्षद प्रतिनिधि मोनू गोहल, वार्ड 50 की पार्षद सुषमा बावीसा और वार्ड 13 के पार्षद मनोज राठौर को टीम में शामिल किए जाने पर सवाल उठे। कार्यकर्ताओं का कहना है कि जमीनी स्तर पर वर्षों से काम कर रहे कार्यकर्ताओं की अनदेखी कर संगठन को “पार्षदों का क्लब” बना दिया गया।

सोशल मीडिया से हटाए गए पोस्ट

विवाद बढ़ता देख भाजपा प्रदेश अध्यक्ष हेमंत खंडेलवाल, शहर अध्यक्ष रविंद्र यती और भाजपा मध्य प्रदेश के आधिकारिक सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म से सूची वाले पोस्ट हटा दिए गए। फिलहाल पूरी कार्यकारिणी को ठंडे बस्ते में डाल दिया गया है। गौरतलब है कि रविंद्र यती की नियुक्ति के करीब एक साल बाद यह कार्यकारिणी घोषित की गई थी। इसमें राजकुमार विश्वकर्मा और अश्विनी राय को उपाध्यक्ष तथा योगेश परमार को महामंत्री बनाया गया था।

अब देखना होगा कि पार्टी नेतृत्व इस विवाद को कैसे सुलझाता है और क्या नई सूची में बदलाव किए जाते हैं या फिर संगठन में बड़े स्तर पर पुनर्विचार होता है। भोपाल भाजपा की यह अंदरूनी खींचतान आने वाले समय में राजनीतिक संकेत भी दे सकती है।

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