Edited By meena, Updated: 09 May, 2026 04:51 PM

पार्टी की गाइडलाइन के अनुसार हर जिले से तीन कार्यकर्ताओं को शामिल किया जाना है, जिनमें एक महिला और एक विशेष आमंत्रित सदस्य शामिल रहेगा। हालांकि छोटे जिलों....
भोपाल : मध्य प्रदेश में हर रोज हो रही राजनीतिक नियुक्तियों पर फिलहाल ब्रेक लग गया है। मुख्यमंत्री मोहन यादव पिछले दो दिनों से मध्यप्रदेश से बाहर प्रवास पर हैं। आज शनिवार को वे कोलकाता दौरे पर हैं। जहां वे भाजपा की नई सरकार के शपथ ग्रहण समारोह में शामिल हुए हैं। तीन राज्यों में भाजपा सरकार गठन की प्रक्रिया के चलते केंद्रीय नेतृत्व भी व्यस्त बताया जा रहा है। इसका असर निगम-मंडलों की शेष नियुक्तियों और अन्य संगठनात्मक फैसलों पर भी पड़ सकता है। फिलहाल मुख्यमंत्री के वापसी के बाद ही बची हुई नियुक्तियों का ऐलान हो सकता है।
इसके साथ ही सरकार ने मई में ओरछा में प्रदेश भाजपा अध्यक्ष हेमंत खंडेलवाल के नेतृत्व में पहली कार्यसमिति बैठक करने की बात कही है। लेकिन इससे पहले नई प्रदेश कार्यसमिति की घोषणा होना जरूरी है। पार्टी की गाइडलाइन के अनुसार हर जिले से तीन कार्यकर्ताओं को शामिल किया जाना है, जिनमें एक महिला और एक विशेष आमंत्रित सदस्य शामिल रहेगा। हालांकि छोटे जिलों- जैसे पांढुर्ना, मैहर, मऊगंज और निवाड़ी में संख्या कम रखी जा सकती है, जबकि बड़े शहरों जैसे भोपाल, ग्वालियर, जबलपुर, इंदौर और रीवा से तीन से पांच सदस्य तक लिए जा सकते हैं।
सूत्रों के अनुसार, जिला इकाइयों को संभावित नामों का पैनल भोपाल भेजना था, लेकिन कई जिलों में स्थानीय विधायक, मंत्री, वरिष्ठ नेता और प्रदेश पदाधिकारी अपने समर्थकों को कार्यसमिति में शामिल कराने के प्रयास में लगे हैं। इसी वजह से आम सहमति नहीं बन पा रही है। नए और पुराने नेताओं के बीच संतुलन, क्षेत्रीय समीकरण और सामाजिक प्रतिनिधित्व को साधना भी नेतृत्व के लिए चुनौती बना हुआ है।
इतना ही नहीं इस बार कार्यसमिति का आकार पिछली बार की तुलना में छोटा रखा जाएगा। जिसमें सिर्फ 162 से कम संख्या रखने की तैयारी है। वहीं विशेष आमंत्रित सदस्यों की संख्या भी लगभग 30 प्रतिशत यानी करीब 32 तक सीमित रखी जा सकती है। फिलहाल कार्यसमिति की घोषणा के लिए थोड़ा इंतजार करना पड़ सकता है।