Edited By meena, Updated: 21 Jul, 2026 06:16 PM

सरकारी दफ्तरों में बैठे बाबू और अधिकारी कैसे भू-माफियाओं के साथ मिलकर करोड़ों की ज़मीन का खेल कर रहे हैं, इसका एक जीता-जागता और सनसनीखेज मामला ग्वालियर जिले के डबरा...
डबरा (भरत रावत) : सरकारी दफ्तरों में बैठे बाबू और अधिकारी कैसे भू-माफियाओं के साथ मिलकर करोड़ों की ज़मीन का खेल कर रहे हैं, इसका एक जीता-जागता और सनसनीखेज मामला ग्वालियर जिले के डबरा से सामने आया है। सोचिए, एक गरीब किसान न्याय मांगने जाता है, और भ्रष्ट सिस्टम उसी की फाइल गायब कर देता है। इतना ही नहीं, बचने के लिए उसे फर्जी फाइल थमा दी जाती है और जान से मारने की धमकियां दी जाती हैं। मामला नेशनल हाईवे से जुड़ी करोड़ों की ज़मीन का है। डबरा अनुविभाग में भ्रष्टाचार की जड़ें कितनी गहरी हैं, ये महेश प्रजापति नाम के इस शख्स की कहानी बयां करती है। महेश, ग्राम चांदपुर वार्ड 28 का रहने वाला है। इसने एसडीएम (SDM) महोदय को एक लिखित शिकायत दी है, जिसमें स्थानीय प्रशासन के बाबुओं और पटवारियों पर बेहद गंभीर आरोप लगाए गए हैं। आरोप है कि तहसील कार्यालय में दर्ज एक बेहद अहम फाइल, जिसका नंबर 170/2018-19/बी-121 है, उसे जानबूझकर खुर्द-बुर्द कर दिया गया है। ये फाइल एसडीएम ऑफिस में पदस्थ रहे बाबू मोहित और राजेश सैनिक ने गायब की है। क्योंकि इस फाइल में दर्ज सर्वे क्रमांक 924 और 925 की ज़मीन नेशनल हाईवे पर स्थित है, जिसकी कीमत आज करोड़ों में है।
बता दे कि भ्रष्टाचार का ये खेल सिर्फ फाइल गायब करने तक सीमित नहीं रहा। महेश का आरोप है कि 13 जुलाई 2026 को उसे कार्यालय बुलाया गया और फाइल मिलने की बात कहकर एक फर्जी कॉपी थमा दी गई। लेकिन झूठ के पैर नहीं होते! अनपढ़ महेश अपने हस्ताक्षर में सिर्फ 'महेश' लिखता है, लेकिन जो फर्जी कॉपी उसे दी गई, उस पर कंप्यूटर से हेरफेर करके 'महेश प्रजापति' के हस्ताक्षर बना दिए गए। जब महेश ने इस फर्जीवाड़े को पकड़ा और अपनी असली फाइल मांगी, तो उसे झूठे सरकारी मुकदमों में फंसाने की धमकियां दी जाने लगीं। तत्कालीन पटवारी और आर.आई. ने अपने ही रिश्तेदारों के नाम पर ज़मीन के पट्टे कर दिए और अब जब उन पट्टों को खारिज कर ज़मीन को वापस सरकारी घोषित करने का आदेश हुआ, तो फाइल ही गायब कर दी गई।
इतना ही नहीं इस पूरे खेल में पुराने तार भी जुड़े हैं। आवेदन के मुताबिक, साल 2002 में अनुकंपा नियुक्ति पर आए पटवारी होतम और तत्कालीन आर.आई. रामप्रकाश ने मिलकर ग्राम चांदपुर की सर्वे क्रमांक 924 की ज़मीन के पट्टे अपने ही परिवार और रिश्तेदारों के नाम कर दिए थे। जो ज़मीन अब बिक भी चुकी है। हैरानी की बात ये है कि अनुविभागीय अधिकारी (SDM) ने इस मामले का निराकरण कर ज़मीन को वापस 'शासकीय' दर्ज करने के आदेश तहसीलदार को दे दिए थे। लेकिन मोहित बाबू और राजेश सैनिक ने वो फाइल तहसीलदार कार्यालय तक पहुंचने ही नहीं दी। आज फरियादी महेश दर-दर की ठोकरें खाने को मजबूर है। उसे मानसिक रूप से प्रताड़ित किया जा रहा है और मोहित बाबू, राजेश सैनिक और पूर्व पटवारी संतोष सिंह चौहान की तरफ से जान से मारने की धमकियां दी जा रही हैं। महेश ने साफ लिखा है कि अगर उसके साथ कोई अप्रिय घटना होती है, तो इसकी जिम्मेदारी इन तीनों की होगी। अब देखना ये है कि 21 जुलाई 2026 को दिए गए इस गंभीर शिकायती आवेदन पर ग्वालियर कलेक्टर और स्थानीय प्रशासन कब तक जागता है? क्या महेश को न्याय मिलेगा, या फाइल की तरह उसकी आवाज़ भी गायब कर दी जाएगी...?