Edited By Himansh sharma, Updated: 15 Feb, 2026 07:47 PM

छत्तीसगढ़ में भगवान शिव के कई प्राचीन और आस्था से जुड़े मंदिर मौजूद हैं
धामधा (हेमंत पाल): छत्तीसगढ़ में भगवान शिव के कई प्राचीन और आस्था से जुड़े मंदिर मौजूद हैं, लेकिन दुर्ग जिले के शिवकोकड़ी गांव में स्थित शिव मंदिर अपनी रहस्यमयी मान्यताओं और स्वयंभू शिवलिंग के कारण एक अलग पहचान रखता है। महाशिवरात्रि के अवसर पर यहां तीन दिवसीय विशाल मेला आयोजित होता है, जिसमें लाखों की संख्या में श्रद्धालु शामिल होते हैं।
आस्था और रहस्य का संगम
दुर्ग जिले के ग्राम शिवकोकड़ी में स्थित यह प्राचीन शिव मंदिर श्रद्धालुओं की गहरी आस्था का केंद्र है। मंदिर में स्थापित शिवलिंग जमीन से लगभग आठ फीट ऊंचा बताया जाता है। मान्यता है कि यह शिवलिंग स्वयंभू है और समय के साथ इसकी ऊंचाई बढ़ती रही है। सावन महीने और महाशिवरात्रि पर यहां दर्शन के लिए भारी भीड़ उमड़ती है। भक्त भगवान भोलेनाथ के दर्शन को अपने जीवन का सौभाग्य मानते हैं।
नदी तट पर बसा आस्था का धाम
यह प्राचीन शिव मंदिर आमनेर नदी के तट पर स्थित है। प्राकृतिक वातावरण और धार्मिक माहौल इसे और भी खास बनाते हैं। यहां दर्शन के लिए केवल दुर्ग ही नहीं, बल्कि राजनांदगांव, कवर्धा और राजधानी रायपुर सहित आसपास के कई जिलों से श्रद्धालु पहुंचते हैं।
मंदिर की विशेषताएं
स्वयंभू शिवलिंग, जिसकी ऊंचाई बढ़ने की मान्यता है
महाशिवरात्रि पर तीन दिवसीय विशाल मेला
सावन महीने में विशेष पूजा-अर्चना और जलाभिषेक
मंदिर परिसर में अन्य देवी-देवताओं की प्रतिमाएं
मुख्य द्वार के बाईं ओर शीतला माता मंदिर और दाईं ओर राधा-कृष्ण मंदिर स्थित हैं, जहां श्रद्धालु पूजा-अर्चना करते हैं
400–500 साल पुराना इतिहास
स्थानीय किवदंतियों के अनुसार इस मंदिर का इतिहास करीब 400 से 500 साल पुराना माना जाता है। बताया जाता है कि जिस स्थान पर मंदिर बना है, वहीं से स्वयंभू शिवलिंग प्रकट हुआ था। समय के साथ मंदिर का विस्तार भी किया गया है।
श्रद्धालुओं की आस्था
मंदिर के पुजारी और स्थानीय श्रद्धालुओं का कहना है कि यहां सच्चे मन से पूजा करने पर मनोकामनाएं पूरी होती हैं। यही वजह है कि सालभर श्रद्धालुओं का आना-जाना लगा रहता है, जबकि सावन और महाशिवरात्रि पर यहां आस्था का सागर उमड़ पड़ता है।