छिंदवाड़ा में सिरप से 10 बच्चों की मौत पर भड़के नेता प्रतिपक्ष, स्वास्थ्य विभाग पर उठाए सवाल, न्यायिक जांच की मांग भी की

Edited By Vikas Tiwari, Updated: 04 Oct, 2025 06:49 PM

opposition leader furious over the death of 10 children due to syrup in chhindwa

मध्य प्रदेश के छिंदवाड़ा जिले के परासिया विकासखंड में फ़र्ज़ी सिरप के कारण नौ मासूम बच्चों की मौत को लेकर नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार ने प्रदेश सरकार पर गंभीर सवाल उठाए हैं। उन्होंने कहा कि यह घटना मध्य प्रदेश की भ्रष्ट, लापरवाह और चरमराई स्वास्थ्य...

भोपाल (इजहार हसन खान): मध्य प्रदेश के छिंदवाड़ा जिले के परासिया विकासखंड में फ़र्ज़ी सिरप के कारण नौ मासूम बच्चों की मौत को लेकर नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार ने प्रदेश सरकार पर गंभीर सवाल उठाए हैं। उन्होंने कहा कि यह घटना मध्य प्रदेश की भ्रष्ट, लापरवाह और चरमराई स्वास्थ्य व्यवस्था का नतीजा है।

सिंघार ने बताया कि प्रदेश के अस्पतालों में बच्चे सुरक्षित नहीं हैं। कहीं चूहे काट रहे हैं, कहीं सुविधाओं की कमी है, डॉक्टर नहीं हैं और कई जगह नकली या अमानक दवाएं मिल रही हैं। उन्होंने कहा कि प्रदेश सरकार द्वारा चलाई जा रही सरदार वल्लभभाई पटेल नि:शुल्क औषधि वितरण योजना में वितरित दवाओं की गुणवत्ता और निगरानी पर्याप्त नहीं है। उन्होंने आंकड़े पेश करते हुए बताया कि नवंबर 2024 में CAG की रिपोर्ट के अनुसार छिंदवाड़ा और ग्वालियर सहित कई जिलों में ₹11 करोड़ से अधिक की 263 दवाएं एक्सपायर हो गईं। अप्रैल 2021 से जून 2025 के बीच सरकारी प्रयोगशालाओं में परीक्षण किए गए 229 दवा नमूनों में से 138 नमूने अमानक पाए गए। कई कंपनियों के लाइसेंस रद्द किए गए, लेकिन कुछ पर कार्रवाई लंबित है।

सिंघार ने उपमुख्यमंत्री और स्वास्थ्य मंत्री राजेंद्र शुक्ला के बयान पर भी सवाल उठाए, जिन्होंने प्रारंभिक टेस्ट क्लीन आने पर कहा कि कफ सिरप से मौतें नहीं हुईं। उन्होंने कहा कि यह बयान केवल तीन सिरपों के लिए था, लेकिन तब तक नुकसान हो चुका था।

नेता प्रतिपक्ष की मांगें…

  • मृत बच्चों के परिजनों को उचित मुआवज़ा और प्रभावित बच्चों को नि:शुल्क इलाज प्रदान किया जाए।
  • दोषी दवा निर्माता कंपनियों और संबंधित अधिकारियों पर आपराधिक प्रकरण दर्ज कर कठोर कार्रवाई की जाए।
  • राज्य के सभी सरकारी और निजी अस्पतालों/फार्मेसियों में उपलब्ध कफ सिरप और अन्य दवाओं की तत्काल सैंपलिंग और लैब टेस्टिंग हो।
  • ड्रग कंट्रोल और दवा गुणवत्ता जाँच प्रयोगशालाओं को मजबूत किया जाए और अधिकारियों की जवाबदेही तय की जाए।
  • पूरे प्रकरण की न्यायिक जांच कराई जाए ताकि जिम्मेदारों की भूमिका स्पष्ट हो और भविष्य में ऐसी घटनाएं न हों।


नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार ने चेतावनी दी कि प्रदेश सरकार यदि दवा गुणवत्ता और स्वास्थ्य व्यवस्था में सुधार नहीं करती है, तो भविष्य में और अधिक गंभीर घटनाएं हो सकती हैं।

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