Edited By Desh Raj, Updated: 19 Feb, 2026 01:24 PM

छतीसगढ़ राज्य के लिए राज्यसभा सीट (Rajya Sabha Election 2026) पर चुनाव का ऐलान हो चुका है। छत्तीसगढ़ के कोटे की दो राज्यसभा सीटों चुनाव 16 मार्च को होने जा रहा है। अगर देखा जाए तो वर्तमान में इन दोनों सीटों पर कांग्रेस काबिज है और ये कांग्रेस के...
(रायपुर): छतीसगढ़ राज्य के लिए राज्यसभा सीट (Rajya Sabha Election 2026) पर चुनाव का ऐलान हो चुका है। छत्तीसगढ़ के कोटे की दो राज्यसभा सीटों चुनाव 16 मार्च को होने जा रहा है। अगर देखा जाए तो वर्तमान में इन दोनों सीटों पर कांग्रेस काबिज है और ये कांग्रेस के खाते में हैं, लेकिन जब 16 मार्च को चुनाव होगा तो एक सीट कांग्रेस के हाथ से निकलकर भाजपा के खाते में चली जाएगी। इसका कारण है विधानसभा में भाजपा विधायकों की संख्या। दरअसल राज्यसभा की सीट आमतौर पर उस पार्टी के खाते में जाती है जिस पार्टी की राज्य विधानसभा में विधायकों की संख्या ज्यादा होती है। साफ है कि छतीसगढ़ विधानसभा में भाजपा विधायकों की संख्या ज्यादा है।
हालांकि क्रॉस वोटिंग बिगाड़ सकती है खेल
लेकिन अगर इसी बीच एक और तथ्य पर बात करें तो वो है क्रॉस वोटिंग। जी हां कई बार पार्टी के भीतर ही उम्मीदवार को लेकर मतभेद होता है और फिर राज्यसभा के चुनाव में क्रॉस वोटिंग भी देखने को मिलती है। कई बार ऐसा पहले हुए चुनावों में देखने को मिला है। विधानसभा में चाहे किसी भी पार्टी के विधायक ज्यादा हों, लेकिन क्रॉस वोटिंग होने से कम सदस्य संख्या पार्टी वाली प्रत्याशी भी जीत जाता है।
दरअसल, पिछली बार जब राज्यसभा सीट के लिए चुनाव हुआ था तो भाजपा विधायकों की संख्या कम थी क्योंकि तब कांग्रेस के विधायक ज्यादा थे। लेकिन अब विधानसभा में भाजपा के 54 और कांग्रेस के 35 विधायक हैं जबकी एक सीट गोंडवाना गणतंत्र पार्टी के पास है।
9 अप्रैल 2026 को रिक्त हो जाएंगी छतीसगढ़ कोटे की 2 सीटें
आपको बता दें कि राज्यसभा में छत्तीसगढ़ के कोटे की 5 में से 2 सीट 9 अप्रैल 2026 को रिक्त हो जाएगी। इनमें फूलो देवी नेताम और केटीएस तुलसी की सीट हैं। चुनाव को लेकर कांग्रेस और भाजपा में सियासी हलचल तेज हो गई है।वहीं जानकारी सामने आ रही है कि कांग्रेस अपनी खाली होने वाली एक सीट पर किसी आदिवासी को मौका दे सकती है। इसी को ध्यान में रखते हुए अभी से बस्तर और सरगुजा के आदिवासी नेता एक्टिव मोड में आ गए है। वहीं भाजपा ने भी अंदरूनी तरीके से अपनी रणनीति बनानी शुरु कर दी है। ऐसा माना जा रहा है कि भाजपा आदिवासी या ओबीसी चेहरे पर बाजी लगा सकती है।
राज्यसभा सदस्य के चुनाव का फॉर्मूला भी है रोचक
राज्यसभा सदस्य के चुनाव एक तय फार्मूले पर होते है। राज्य में जितनी राज्यसभा सीटें खाली हैं, उसमें 1 जोड़ा जाता है। फिर उसे कुल विधानसभा सीटों की संख्या से भाग दिया जाता है। इससे जो संख्या आती है, उसमें फिर 1 जोड़ दिया जाता है।
जैसे छत्तीसगढ़ के 90 विधानसभा सदस्य हैं तो 2 राज्यसभा सीट के लिए चुनाव हो रहा है । तो इननें 1 जोड़ने पर 3 संख्या प्राप्त होती है। अब विधायकों की कुल संख्या यानी 90 में 3 से भाग देने पर 30 आता है और इसमें फिर 1 जोडऩे पर 31 हो जाएगा। इस तरह प्रत्याशी को जीत के लिए कम से कम 31 विधायकों का समर्थन चाहिए।