सिलेंडर मिला नहीं, लेकिन खाते में आ गए सब्सिडी के पैसे! उज्ज्वला योजना में बड़ा खेल?

Edited By meena, Updated: 19 May, 2026 07:28 PM

a major scam in the ujjwala scheme

सरकार गरीबों के घर चूल्हा जलाने के लिए करोड़ों रुपए खर्च कर रही है, लेकिन खैरागढ़ जिले में उज्ज्वला योजना पर ही सवाल खड़े होने लगे हैं। यहां उपभोक्ताओं का आरोप है कि गैस एजेंसी के कर्मचारी पहले ओटीपी...

खैरागढ़ (श्रेयांश सिंह) : सरकार गरीबों के घर चूल्हा जलाने के लिए करोड़ों रुपए खर्च कर रही है, लेकिन छत्तीसगढ़ के खैरागढ़ जिले में उज्ज्वला योजना पर ही सवाल खड़े होने लगे हैं। यहां उपभोक्ताओं का आरोप है कि गैस एजेंसी के कर्मचारी पहले OTP लेते हैं, फिर रिकॉर्ड में सिलेंडर डिलीवर दिखा देते हैं। हैरानी की बात यह है कि उपभोक्ताओं के खाते में सब्सिडी का पैसा भी पहुंच जाता है, लेकिन गैस सिलेंडर घर तक नहीं पहुंचता। अब सवाल उठ रहा है कि आखिर बिना गैस दिए डिलीवरी कैसे पूरी हो रही है और विभाग आंख मूंदकर बैठा क्यों है?

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पूरा मामला खैरागढ़ जिले के बाजार आतरिया क्षेत्र स्थित साल्हेकला इंडियन गैस एजेंसी का है। ग्रामीण उपभोक्ताओं ने गंभीर आरोप लगाते हुए कहा है कि एजेंसी कर्मचारी गैस वितरण से पहले मोबाइल पर आए OTP की मांग करते हैं। जैसे ही उपभोक्ता ओटीपी बताते हैं, सिस्टम में सिलेंडर डिलीवर दिखा दिया जाता है। लेकिन असली खेल इसके बाद शुरू होता है। उपभोक्ताओं के मुताबिक कई-कई दिन गुजर जाने के बाद भी सिलेंडर उनके घर नहीं पहुंचता। कुछ लोगों ने तो यहां तक दावा किया कि दो-दो और तीन-तीन बार सब्सिडी का पैसा खाते में आ गया, लेकिन गैस का सिलेंडर कभी मिला ही नहीं।

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ग्रामीणों का कहना है कि जब एजेंसी में शिकायत की जाती है तो हर बार नया बहाना मिलता है। कभी कहा जाता है “गाड़ी रास्ते में है”, कभी “कल पहुंच जाएगा”, तो कभी “लोडिंग नहीं हुई” कहकर उपभोक्ताओं को टाल दिया जाता है। गरीब परिवार घंटों एजेंसी के चक्कर काटने को मजबूर हैं, जबकि रिकॉर्ड में सबकुछ सही दिखाया जा रहा है।

सबसे बड़ा सवाल गैस वितरण प्रणाली और विभागीय निगरानी पर उठ रहा है। आखिर बिना उपभोक्ता को सिलेंडर दिए सब्सिडी कैसे जारी हो रही है? क्या विभाग केवल सिस्टम में “डिलीवर” दिखने भर से संतुष्ट हो जाता है? अगर उपभोक्ता के घर तक गैस पहुंची ही नहीं, तो फिर सब्सिडी किस आधार पर जारी की गई?

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सूत्रों की मानें तो उपभोक्ताओं के नाम पर रिफिल किए गए घरेलू सिलेंडरों को दूसरे स्थानों पर खपाया जा रहा है। आरोप है कि घरेलू गैस का उपयोग कमर्शियल कामों में कर अधिक मुनाफा कमाया जा रहा है। यही वजह है कि गरीब उपभोक्ता खाली सिलेंडर लेकर इंतजार करते रह जाते हैं और रिकॉर्ड में गैस वितरण पूरा दिखा दिया जाता है।

साल्हेकला एजेंसी सीमावर्ती क्षेत्र में होने के कारण यहां बेमेतरा और दुर्ग जिले के सैकड़ों उपभोक्ता जुड़े हुए हैं। बताया जा रहा है कि करीब 800 से 900 परिवार इस गड़बड़ी से प्रभावित हो सकते हैं। यदि ओटीपी एंट्री, डिलीवरी रिकॉर्ड और वास्तविक वितरण की निष्पक्ष जांच हो जाए तो बड़ा फर्जीवाड़ा सामने आ सकता है।

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इस मामले में खैरागढ़ SDM सुरेंद्र कुमार ठाकुर ने जांच के निर्देश दिए जाने की बात कही है। लेकिन बड़ा सवाल यह है कि क्या जिम्मेदार विभाग केवल जांच का आश्वासन देकर मामले को ठंडे बस्ते में डाल देगा, या फिर गरीबों के हिस्से की गैस गायब करने वालों पर सख्त कार्रवाई भी होगी।

उज्ज्वला योजना गरीब महिलाओं को धुएं से राहत देने के लिए शुरू की गई थी, लेकिन अगर उपभोक्ता के घर गैस पहुंचे बिना ही सब्सिडी जारी हो रही है, तो यह सिर्फ एक एजेंसी की लापरवाही नहीं बल्कि पूरी व्यवस्था पर बड़ा सवाल है।

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