सामाजिक बहिष्कार से पीड़ित शख्स ने कलेक्ट्रेट में उठाया खतरनाक कदम,बोला- गांव में बच्चों का जीना भी हुआ मुश्किल

Edited By Desh Raj, Updated: 09 Feb, 2026 04:42 PM

a man suffering from social ostracism took a dangerous step at the collectorate

जिले के कलेक्टरेट परिसर में उस वक्त अफरा-तफरी मच गई, जब दिनदहाड़े एक व्यक्ति ने खुद को नुकसान पहुंचाने का प्रयास किया। घटना के समय परिसर में अधिकारी, कर्मचारी और आम नागरिक मौजूद थे।

खैरागढ़( हेमंत पाल): जिले के कलेक्टरेट परिसर में उस वक्त अफरा-तफरी मच गई, जब दिनदहाड़े एक व्यक्ति ने खुद को नुकसान पहुंचाने का प्रयास किया। घटना के समय परिसर में अधिकारी, कर्मचारी और आम नागरिक मौजूद थे। अचानक हुई इस घटना से पूरे कलेक्टरेट में हड़कंप की स्थिति बन गई, हालांकि पुलिस और कर्मचारियों की तत्परता से एक बड़ा हादसा टल गया।

गांव में कथित सामाजिक बहिष्कार से तंग हुआ शख्स

 

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जानकारी के अनुसार, पीड़ित की पहचान शीतलाल निर्मलकर, निवासी कटंगी, गंडई के रूप में हुई है। बताया जा रहा है कि वह लंबे समय से गांव में कथित सामाजिक बहिष्कार का सामना कर रहा था। इसी मामले को लेकर वह लगातार प्रशासनिक दफ्तरों के चक्कर काट रहा था, लेकिन कहीं से भी उसे संतोषजनक समाधान नहीं मिल पाया।

प्रत्यक्षदर्शियों के मुताबिक, शीतलाल ने अचानक ऐसा कदम उठाने की कोशिश की, जिससे वहां मौजूद लोग सन्न रह गए। मौके पर तैनात पुलिसकर्मियों और कर्मचारियों ने तत्काल हस्तक्षेप करते हुए स्थिति को संभाल लिया और उसे सुरक्षित किया। इस दौरान वह हल्का घायल हुआ, लेकिन समय रहते उसकी जान बचा ली गई। घटना के बाद पुलिस ने उसे सुरक्षा में लेकर जिला अस्पताल पहुंचाया, जहां प्राथमिक उपचार के बाद चिकित्सकों ने उसकी हालत स्थिर बताई है।

पीड़ित का आरोप है कि गांव में कुछ प्रभावशाली लोगों द्वारा उसका सामाजिक बहिष्कार किया गया है। उसका कहना है कि विरोध करने पर न सिर्फ उस पर दबाव बनाया गया, बल्कि उसे और उसके परिवार को सामाजिक रूप से अलग-थलग कर दिया गया। बच्चों तक को इससे प्रभावित होना पड़ रहा है। शीतलाल ने दावा किया कि उसने इस संबंध में थाना, कलेक्टर कार्यालय, गृह मंत्रालय और मानवाधिकार आयोग तक शिकायतें कीं, लेकिन कहीं भी प्रभावी कार्रवाई नहीं हुई। लगातार उपेक्षा और मानसिक दबाव ने उसे इस हद तक पहुंचा दिया।

इस घटना ने एक बार फिर प्रशासनिक संवेदनशीलता, ग्रामीण क्षेत्रों में सामाजिक बहिष्कार और न्याय तक आम आदमी की पहुंच जैसे गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। फिलहाल पुलिस पूरे मामले की जांच में जुटी है, वहीं प्रशासन स्तर पर शिकायतों की पुनः समीक्षा की बात कही जा रही है।

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