Edited By Himansh sharma, Updated: 27 May, 2026 01:23 PM

प्रधानमंत्री आवास योजना के नाम पर गरीब परिवारों से कथित वसूली और फर्जी दस्तावेज तैयार कर लाभ दिलाने के आरोपों ने सक्ती जिले की बाराद्वार नगर पंचायत में बड़ा विवाद खड़ा कर दिया है।
सक्ती। प्रधानमंत्री आवास योजना के नाम पर गरीब परिवारों से कथित वसूली और फर्जी दस्तावेज तैयार कर लाभ दिलाने के आरोपों ने सक्ती जिले की बाराद्वार नगर पंचायत में बड़ा विवाद खड़ा कर दिया है। मामले में भाजपा से जुड़े कुछ स्थानीय नेताओं और एक पटवारी पर गंभीर आरोप लगाए गए हैं। शिकायत सामने आने के बाद जिला प्रशासन ने तत्काल कार्रवाई करते हुए संबंधित पटवारी को निलंबित कर जांच शुरू कर दी है।
बताया जा रहा है कि योजना का लाभ दिलाने के नाम पर करीब 700 परिवारों से मोटी रकम वसूले जाने के आरोप लगे हैं। शिकायतकर्ताओं का कहना है कि सरकारी भूमि से जुड़े दस्तावेजों में कथित तौर पर छेड़छाड़ कर आवास स्वीकृति की प्रक्रिया आगे बढ़ाई जा रही थी।
नगर पंचायत के नेता प्रतिपक्ष अभिषेक राय ने आरोप लगाया कि कुछ जनप्रतिनिधियों और राजस्व अमले की मिलीभगत से गरीब परिवारों को भ्रमित किया गया। दावा किया गया कि लोगों से पैसे लेकर ऐसे दस्तावेज तैयार किए गए, जिनसे आगे चलकर लाभार्थियों को कानूनी और प्रशासनिक परेशानियों का सामना करना पड़ सकता है।
शिकायत में यह भी कहा गया कि शासन के नियमों के अनुसार पात्र लोगों को प्रक्रिया पूरी होने के बाद आवास योजना का लाभ मिलना चाहिए, लेकिन कथित तौर पर नियमों को दरकिनार कर फर्जी तरीके से प्रक्रिया आगे बढ़ाई गई। आरोपों में यह भी उल्लेख है कि बिना आवश्यक स्थल सत्यापन और जियो टैगिंग के दस्तावेज तैयार किए गए।
मामले की गंभीरता को देखते हुए कलेक्टर अमृत विकास तोपनो ने संबंधित पटवारी को सस्पेंड कर दिया है और पूरे मामले की जांच के लिए टीम गठित की है। जांच की जिम्मेदारी डिप्टी कलेक्टर को सौंपी गई है। अब सभी की नजर जांच रिपोर्ट पर है, जिससे तय होगा कि यह प्रशासनिक लापरवाही थी या योजनाबद्ध गड़बड़ी। यदि आरोप सही पाए जाते हैं, तो यह मामला गरीबों के सपनों और सरकारी योजनाओं की विश्वसनीयता दोनों पर बड़ा सवाल खड़ा कर सकता है।