Edited By meena, Updated: 12 May, 2026 05:24 PM

कलेक्ट्रेट उस समय भावुक क्षणों की गवाह बनी, जब अपनी बेटी और परिजनों के जीवन बचाने की गुहार लेकर पहुंचे पीड़ितों को कलेक्टर ने न केवल ढांढस बंधाया, बल्कि तत्काल आर्थिक मदद की घोषणा कर...
गुना (मिस्बाह नूर) : कलेक्ट्रेट उस समय भावुक क्षणों की गवाह बनी, जब अपनी बेटी और परिजनों के जीवन बचाने की गुहार लेकर पहुंचे पीड़ितों को कलेक्टर ने न केवल ढांढस बंधाया, बल्कि तत्काल आर्थिक मदद की घोषणा कर उनकी उम्मीदों को नई रोशनी दी है।
दरअसल, गुलाबगंज कैंट निवासी शीला साहू अपनी बेटी वंदना साहू के इलाज के लिए गुहार लगाने पहुंची थीं। वंदना के दिल में छेद है और अब उसे एक जटिल ऑपरेशन और महंगे इलाज की जरूरत है। मां शीला ने बताया कि बेटी की शादी में लाखों खर्च करने के बाद उसकी बीमारी में भी अब तक 10 लाख रुपये लग चुके हैं। हालत यह हुई कि इलाज के लिए उन्हें अपना मकान तक बेचना पड़ा।
दुखद पहलू यह रहा कि बीमारी के चलते ससुराल वालों ने भी वंदना को मायके छोड़ दिया। शीला ने रोते हुए बताया कि अब वंदना को बेहद महंगे इंजेक्शन लगने हैं, जिसमें एक इंजेक्शन की कीमत 75 हजार रुपये है। महिला की बेबसी देख कलेक्टर भावुक हो उठे। उन्होंने मां को ढांढस बंधाया और बड़ी घोषणा करते हुए कहा आप चिंता न करें, बेटी का इलाज होगा। पहले इंजेक्शन का खर्च मैं स्वयं उठाऊंगा। उन्होंने समाजसेवियों और जनप्रतिनिधियों से भी शीला साहू की मदद करने करने का आग्रह किया है।

वहीं एक अन्य मार्मिक आवेदन राघौगढ़ तहसील के ग्राम गोविंदपुरा निवासी प्रेम सिंह जाटव ने दिया। उन्होंने बताया कि उनकी पत्नी हेमलता जाटव साल 2023 से गंभीर हृदय रोग से जूझ रही हैं। प्रेम सिंह ने बताया कि आयुष्मान कार्ड होने के बावजूद दवाइयों और अन्य जांचों पर अब तक हजारों रुपये खर्च हो चुके हैं। आर्थिक स्थिति इतनी कमजोर है कि आगे का इलाज कराना अब उनके बस से बाहर होता जा रहा है। कलेक्टर ने प्रेम सिंह की समस्या को गंभीरता से लेते हुए मौके पर ही तत्कालिक आर्थिक सहायता राशि स्वीकृत की और आश्वस्त किया कि भविष्य में भी इलाज में शासन स्तर पर कोई कमी नहीं आने दी जाएगी।
जनसुनवाई में आए इन दोनों मामलों में कलेक्टर के त्वरित निर्णय और व्यक्तिगत संवेदनशीलता की हर तरफ सराहना हो रही है। पीड़ितों ने हाथ जोड़कर प्रशासन का आभार व्यक्त किया। कलेक्टर ने अधिकारियों को निर्देशित किया है कि ऐसे गंभीर बीमारियों के मामलों में कागजी कार्रवाई में देरी न की जाए और मरीजों को बेहतर से बेहतर इलाज मुहैया कराया जाए। उन्होंने जनसुनवाई कक्ष में ही लोगों को स्वस्थ रहने के कुछ टिप्स भी दिए।