बीजेपी से इस्तीफे के बाद फूटा सिंधिया समर्थक का दर्द, कहा - महाराज के करीबी मंत्री तक अपने काम नहीं करा पा रहे

Edited By Himansh sharma, Updated: 16 May, 2026 07:40 PM

scindia supporter quits bjp exposes internal rift

मध्यप्रदेश की सियासत में ग्वालियर एक बार फिर बड़ा राजनीतिक अखाड़ा बनता दिख रहा है।

ग्वालियर (अंकुर जैन): मध्यप्रदेश की सियासत में ग्वालियर एक बार फिर बड़ा राजनीतिक अखाड़ा बनता दिख रहा है। खुद को “कट्टर सिंधिया समर्थक” बताने वाले पूर्व पार्षद देवेंद्र पाठक अब खुलकर भाजपा और सिंधिया खेमे की कार्यशैली पर सवाल उठा रहे हैं। भाजपा से इस्तीफा दे चुके पाठक के तेवरों ने न सिर्फ ग्वालियर बल्कि भोपाल और दिल्ली तक राजनीतिक हलचल बढ़ा दी है।

देवेंद्र पाठक ने साफ शब्दों में कहा कि “महाराज” यानी ज्योतिरादित्य सिंधिया की भाजपा सरकार में अब पहले जैसी पकड़ नहीं रही। उन्होंने दावा किया कि सिंधिया समर्थक नेताओं और मंत्रियों की सुनवाई तक नहीं हो रही। पाठक ने यहां तक कह दिया कि जब मंत्री तुलसीराम सिलावट, गोविंद सिंह राजपूत और प्रद्युम्न सिंह तोमर जैसे नेताओं के काम नहीं हो पा रहे, तो फिर ऐसे पद पर बने रहने का क्या मतलब है।

पाठक ने तीखे अंदाज में कहा कि सिंधिया समर्थक मंत्री आखिर इस्तीफा क्यों नहीं दे रहे? अगर पार्टी में सम्मान नहीं मिल रहा तो चुप क्यों बैठे हैं? उन्होंने आरोप लगाया कि भाजपा में सिंधिया समर्थकों को धीरे-धीरे कमजोर करने की कोशिश हो रही है और निगम-मंडलों में भी इस बार उनके लोगों को जगह नहीं दी गई।

सबसे दिलचस्प बात यह रही कि कांग्रेस में शामिल होने के सवाल पर पाठक ने सीधे तौर पर इनकार नहीं किया। उन्होंने संकेत दिए कि जल्द बड़ा राजनीतिक फैसला हो सकता है। सूत्रों की मानें तो ग्वालियर में उनकी “धमाकेदार कांग्रेस एंट्री” की चर्चाएं तेज हैं।

अब राजनीतिक नजरें इस बात पर टिकी हैं कि क्या देवेंद्र पाठक सचमुच कांग्रेस का दामन थामेंगे या सिंधिया समर्थकों की नाराजगी भाजपा के भीतर ही नया सियासी संकट खड़ा करेगी। ग्वालियर की राजनीति में उठी यह चिंगारी आने वाले दिनों में प्रदेश की सत्ता और संगठन दोनों के लिए बड़ा सिरदर्द बन सकती है।

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