चाय बनाने वाले की बेटी बनी एयरफोर्स पायलट, बोली- पापा से सीखा हार न मानने का हुनर

Edited By meena, Updated: 23 Jun, 2020 07:44 PM

मध्य प्रदेश के नीमच में चाय की गुमटी लगाने वाले की बेटी ने अपने सपने साकार कर लिए। बचपन से ही सेना में जाने का जुनून आज सच हो गया। नीमच की बेटी भारतीय वायु सेना में अफसर बन गई है। शनिवार को वायु सेना अकादमी डांडीगल हैदराबाद में हुई पासिंग आउट परेड...

नीमच: मध्य प्रदेश के नीमच में चाय की गुमटी लगाने वाले की बेटी ने अपने सपने साकार कर लिए। बचपन से ही सेना में जाने का जुनून आज सच हो गया। नीमच की बेटी भारतीय वायु सेना में अफसर बन गई है। शनिवार को वायु सेना अकादमी डांडीगल हैदराबाद में हुई पासिंग आउट परेड में आंचल को राष्ट्रपति अवार्ड से सम्मानित किया गया। आंचल 123 फ्लाइट कैडेटों के साथ शनिवार को वायु सेना के अधिकारियों में शामिल हो गई है।

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आंचल के पिता सुरेश गंगवाल चाय की गुमटी लगाते हैं और माता बबिता गंगवाल गृहिणी है। मध्य प्रदेश की 23 साल की आंचल जब हैदराबाद में एयरफोर्स ट्रेनिंग एकेडमी में एयर चीफ मार्शल आरकेएस भदौरिया के सामने मार्च पास्ट कर रही थीं तो उनकी आंखों में आंसू आ गए। इसकी वजह है उनके पिता व उनका संघर्ष, जिन्होंने तमाम मुश्किलों के बीच बेटी का साथ दिया। शनिवार को 123 कैडेट्स के साथ आंचल गंगवाल की भारतीय वायुसेना में कमिश्निंग हो गई।


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सीएम शिवराज सिंह ने दी बधाई
वहीं इस उपलब्धि के लिए सीएम शिवराज सिंह ने आंचल को बधाई दी है। उन्होंने ट्वीट करते हुए लिखा कि मध्यप्रदेश को गौरवान्वित करने वाली बेटी आंचल अब देश के गौरव और सम्मान की रक्षा के लिए अनंत आकाश की ऊंचाइयों में उड़ान भरेगी। बेटी को बधाई, आशीर्वाद और शुभकामनाएं!

 


आंचल के पिता ने कहा- मुझे गर्व है
आंचल के पिता सुरेश गंगवाल के अनुसार, मेरे दो बेटी और एक बेटा है। मैंने कभी बेटियों को आगे बढ़ने से नहीं रोका। बड़ी बेटी ने कड़ी मेहनत कर आज यह मुकाम हासिल किया है। आंचल ने अपने सपनों को पूरा करने के लिए विषम परिस्थितियों का भी सहजता से सामना किया। यही अब तक की मेरी पूंजी और बचत है। सीताराम जाजू शासकीय स्नातकोत्तर महाविद्यालय नीमच से कम्प्यूटर साइंस से स्नातक किया है। वह शुरू से ही पढ़ाई में टॉपर रही है। बोर्ड की परीक्षा में उसने 92 प्रतिशत से ज्यादा अंक हासिल किए थे।

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विषम परिस्थितियों में भी साकारात्मक सोच
आंचल के पिता ने बताया कि मेरे तीनों बच्चे शुरू से ही अनुशासन में रहे। मैं पत्नी के साथ बस स्टैंड पर चाय-नाश्ते का ठेला लगाता हूं। जब मैं काम करता तो तीनों बच्चे हमें देखते रहते थे। कभी कोई फरमाइश नहीं की। जो मिल जाता उसमें खुश रहते। कभी भी दूसरों की देखा-देखी नहीं की।’ यही अब तक की मेरी पूंजी और बचत है।

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यहां से मिली प्रेरणा
पिता के अनुसार, 2013 में उत्तराखंड में आई त्रासदी और वायुसेना ने जिस तरह वहां काम किया। उसे देखकर आंचल ने अपना मन बदला और वायुसेना में जाने की तैयारी की। वायु सेना में जाने से पहले आंचल मध्यप्रदेश पुलिस में उपनिरीक्षक और श्रम विभाग में श्रम निरीक्षक के रूप में आठ महीने तक काम कर चुकी हैं। लेकिन उसने यह नौकरी छोड़ दी। 

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पापा से सीखा आगे बढ़ने का हुनर
आंचल का कहना है कि जीवन में आर्थिक परेशानियां आती हैं लेकिन मुश्किलों का मुकाबला करने का हौसला होना जरूरी है।’ शुरु से ही मेरा केवल एक लक्ष्य था। हर हाल में वायुसेना में जाना है। आखिरकार छठवीं कोशिश में मुझे सफलता मिली।’ ‘मुसीबतों से न घबराने का सबक उन्होंने अपने पिता से सीखा है।

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मातृ सेवा के लिए हमेशा तैयार हूं
आंचल ने अपनी कामयाबी का श्रेय मां बबीता और पिता सुरेश गंगवाल को दिया। उन्होंने कहा, ‘जब मैंने माता-पिता से कहा कि मैं रक्षा क्षेत्र में जाना चाहती हूं तो वे थोड़े परेशान थे। हालांकि उन्होंने मुझे कभी रोकने की नहीं की। असल में, वे मेरे जीवन के आधार स्तंभ हैं। मैं अपनी देशसेवा के लिए हमेशा तैयार हूं।’ 

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