Edited By Desh sharma, Updated: 04 Feb, 2026 08:15 PM

क्रांतिवीर तात्याटोपे विश्वविद्यालय की भारी लापरवाही के कारण क्षेत्र के सैकड़ों छात्र-छात्राओं का भविष्य दांव पर लग गया है। 5 फरवरी से एमए, एमएससी और एमकॉम की परीक्षाएं शुरू होनी हैं, लेकिन 4 फरवरी की शाम तक भी बड़ी संख्या में विद्यार्थियों के...
गुना (मिस्बाह नूर): क्रांतिवीर तात्याटोपे विश्वविद्यालय की भारी लापरवाही के कारण क्षेत्र के सैकड़ों छात्र-छात्राओं का भविष्य दांव पर लग गया है। 5 फरवरी से एमए, एमएससी और एमकॉम की परीक्षाएं शुरू होनी हैं, लेकिन 4 फरवरी की शाम तक भी बड़ी संख्या में विद्यार्थियों के एनरोलमेंट (नामांकन) जनरेट नहीं हो पाए हैं। इस गंभीर समस्या को लेकर एनएसयूआई ने विश्वविद्यालय परिसर में जोरदार प्रदर्शन किया और मुख्य गेट पर ताला जड़ दिया।
छात्रों का आरोप है कि विश्वविद्यालय की वेबसाइट पिछले कई दिनों से ठीक से काम नहीं कर रही है। सर्वर डाउन होने और वेबसाइट न खुलने के कारण गुना, शिवपुरी और अशोकनगर के करीब 500 छात्र-छात्राएं अपने आवश्यक दस्तावेज जमा नहीं कर पाए। दस्तावेज प्रक्रिया पूरी न होने से उनके एनरोलमेंट जनरेट नहीं हुए हैं, जिसके बिना वे गुरुवार को होने वाली परीक्षा में शामिल नहीं हो सकेंगे।
अकेले गुना जिले के ही लगभग 125 छात्र इस समस्या से जूझ रहे हैं। छात्रों की समस्या को लेकर जब एनएसयूआई कार्यकर्ता विश्वविद्यालय पहुंचे, तो उन्हें भारी संवेदनहीनता का सामना करना पड़ा। संगठन का दावा है कि कुलपति ज्ञापन लेने के लिए बाहर ही नहीं आए। बताया गया कि वे लंच पर गए हुए हैं। इस दौरान आरोप लगाया कि कुलपति ने अपना मोबाइल फोन भी बंद कर लिया था ताकि उनसे संपर्क न किया जा सके। काफी देर इंतजार करने के बाद जब कोई सुनवाई नहीं हुई, तो आक्रोशित सदस्यों ने विश्वविद्यालय का मुख्य गेट बंद कर नारेबाजी शुरू कर दी।
विश्वविद्यालय परिसर में बढ़ते तनाव और हंगामे की सूचना मिलते ही तहसीलदार मौके पर पहुंचे। एनएसयूआई ने कुलपति की अनुपस्थिति में तहसीलदार को ही ज्ञापन सौंपा। संगठन की प्रमुख मांग है कि जब तक सभी छात्रों के एनरोलमेंट जनरेट नहीं हो जाते, तब तक परीक्षा की तिथि को आगे बढ़ाया जाए। छात्रों का कहना है कि यदि उन्हें परीक्षा से वंचित रखा गया, तो उनका पूरा साल बर्बाद हो जाएगा।
प्रशासनिक अधिकारियों और विश्वविद्यालय प्रबंधन के बीच तालमेल की कमी का खामियाजा अब शिवपुरी, अशोकनगर और गुना के उन 500 छात्र-छात्राओं को भुगतना पड़ सकता है जिन्होंने साल भर मेहनत की है। फिलहाल, छात्र इस उम्मीद में हैं कि प्रशासन उनकी पीड़ा समझेगा और परीक्षा की तारीखों में बदलाव कर उन्हें राहत प्रदान करेगा।