Edited By meena, Updated: 04 Feb, 2026 08:06 PM

जहां देशभर में उच्च शिक्षा संस्थानों में समानता का संवर्धन विनियम- 2026 का जमकर विरोध हो रहा है, वहीं मध्य प्रदेश के छतरपुर में नए नियमों के समर्थन में बुधवार को एससी, एसटी और...
छतरपुर (राजेश चौरसिया) : जहां देशभर में उच्च शिक्षा संस्थानों में समानता का संवर्धन विनियम- 2026 का जमकर विरोध हो रहा है, वहीं मध्य प्रदेश के छतरपुर में नए नियमों के समर्थन में बुधवार को एससी, एसटी और ओबीसी वर्ग के छात्रों ने कलेक्ट्रेट परिसर में धरना-प्रदर्शन किया। छात्रों ने प्रशासन को ज्ञापन सौंपते हुए इन नियमों को सामाजिक न्याय की दिशा में एक अहम कदम बताया।
प्रदर्शन कर रहे छात्रों का कहना है कि यह विनियम उच्च शिक्षण संस्थानों में जाति आधारित भेदभाव को रोकने और वंचित वर्गों के विद्यार्थियों के लिए सुरक्षित व समान वातावरण सुनिश्चित करने में सहायक होगा। ज्ञापन में उल्लेख किया गया कि प्रस्तावित इक्विटी कमेटियों के गठन से संविधान में निहित समानता और सामाजिक न्याय के मूल्यों को मजबूती मिलेगी।

छात्रों ने कहा कि रोहित वेमुला और पायल तड़वी जैसे मामलों के बाद यह स्पष्ट हो गया था कि विश्वविद्यालय परिसरों में भेदभाव और उत्पीड़न रोकने के लिए सख्त दिशा-निर्देशों की आवश्यकता है। यूजीसी के नए विनियम इसी जरूरत को पूरा करते हैं।

छात्रों ने मांग की कि यूजीसी के इन विनियमों को बिना किसी बदलाव के पूरे देश में लागू किया जाए। साथ ही चेतावनी दी कि यदि नियमों को वापस लेने या कमजोर करने की कोशिश की गई, तो आंदोलन को और तेज किया जाएगा। प्रशासन की ओर से छात्रों को आश्वासन दिया गया कि उनका ज्ञापन संबंधित विभाग को भेजा जाएगा। हालांकि प्रशासन की मौजूदगी में प्रदर्शन शांतिपूर्ण ढंग से संपन्न हुआ।

बता दें कि रोहित वेमुला और पायल तड़वी ने यूनिवर्सिटी में प्रताड़ना से तंग आकर आत्महत्या कर ली। उनके परिजन सुप्रीम कोर्ट गए थे। उनकी याचिका पर जनवरी 2025 में सुप्रीम कोर्ट ने UGC ने नए नियम बनाने के आदेश दिए। ऐसे में सरकार ने पुराने नियमों में बदलाव करते हुए 13 जनवरी 2026 को नए नियमों को लागू करने की नोटिफिकेश जारी की थी।