पन्ना की प्रतिभा सिंह सोलंकी ने रचा इतिहास, 10वीं में 500 में से 499 अंक पाकर बनीं टॉपर

Edited By meena, Updated: 15 Apr, 2026 03:02 PM

panna s pratibha singh solanki becomes 10th grade topper

मध्य प्रदेश के पन्ना को वैसे तो हीरों की खान कहा जाता है। जहां बेशकीमती हीरे निकलते हैं, लेकिन आज 10वीं बोर्ड के नतीजे सामने आने के बाद साबित हो गया कि पन्ना में केवल हीरे ही नहीं, बल्कि अनमोल प्रतिभाएं भी जन्म लेती हैं...

पन्ना (टाइगर खान) : मध्य प्रदेश के पन्ना को वैसे तो हीरों की खान कहा जाता है। जहां बेशकीमती हीरे निकलते हैं, लेकिन आज 10वीं बोर्ड के नतीजे सामने आने के बाद साबित हो गया कि पन्ना में केवल हीरे ही नहीं, बल्कि अनमोल प्रतिभाएं भी जन्म लेती हैं। इसे सच कर दिखाया है गुन्नौर तहसील के हिनौती गांव की बेटी प्रतिभा सिंह सोलंकी ने। माध्यमिक शिक्षा मंडल, मध्यप्रदेश द्वारा घोषित 10वीं की बोर्ड परीक्षा में प्रतिभा ने 500 में से 499 अंक प्राप्त कर प्रदेश की प्रावीण्य सूची में पहला स्थान हासिल किया है।

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एक साधारण परिवार से ताल्लुक रखने वाली प्रतिभा के पिता रोजगार सहायक हैं। प्रतिभा की इस ऐतिहासिक सफलता ने यह साबित कर दिया कि यदि लक्ष्य के प्रति समर्पण हो, तो सुख-सुविधाएं गौण हो जाती हैं। जैसे ही नतीजों की घोषणा हुई, हिनौती गांव में जश्न का माहौल छा गया। प्रतिभा के घर बधाई देने वालों का तांता लगा हुआ है।

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​बेटी की उपलब्धि पर भावुक पिता ने कहा, "यह उसकी वर्षों की कड़ी मेहनत, अनुशासन और लगन का मीठा फल है।" प्रतिभा शुरू से ही मेधावी रही हैं और उन्होंने अपनी सफलता का श्रेय माता-पिता के मार्गदर्शन और शिक्षकों के सहयोग को दिया है। पन्ना जिले का नाम रोशन करने वाली इस बिटिया के उज्ज्वल भविष्य के लिए पूरा प्रदेश शुभकामनाएं दे रहा है।

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बता दे कि प्रतिभा के पिता भारतेंद्र सिंह सोलंकी रोजगार सहायक हैं। उन्होंने बताया कि बेटी शुरू से ही कड़ी मेहनत कर रही थी। प्रतिभा ने भी अन्य छात्र-छात्राओं को यह संदेश दिया कि अगर आपका लक्ष्य सही है तो उसे पाने के लिए जी तोड़ मेहनत की जाए तो किसी भी लक्ष्य को पाया जा सकता है।

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प्रतिभा सिंह सोलंकी रोज रात 8 से 11 बजे तक पढ़ती थी और सुबह के समय भी 2 घंटे रोजाना पढ़ाई को देती थीं। प्रतिभा ने 10वीं में टॉप करने का पूरा अपने शिक्षकों और परिवार को दिया है। उन्होंने बताया कि स्कूल में ही उनके सभी डाउट्स हल हो जाते थे, जिससे उन्हें घर पर रिवीजन करने में काफी मदद मिलती थी।

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