Edited By Desh Raj, Updated: 13 Feb, 2026 04:50 PM

कर्नल सोफिया कुरैशी को लेकर दिए बयान को लेकर मंत्री विजय शाह की मुश्किलें वैसे को आए दिन के साथ बढ़ती जा रही है लेकिन अब उनके पक्ष में समाज लामबंद होता दिखाई दे रहा है। अब मंत्री विजय शाह के समर्थन में आदिवासी समाज के साथ ही छात्र संगठन खुलकर...
(अशोकनगर): कर्नल सोफिया कुरैशी को लेकर दिए बयान को लेकर मंत्री विजय शाह की मुश्किलें वैसे को आए दिन के साथ बढ़ती जा रही है लेकिन अब उनके पक्ष में समाज लामबंद होता दिखाई दे रहा है। अब मंत्री विजय शाह के समर्थन में आदिवासी समाज के साथ ही छात्र संगठन खुलकर सामने आ गए हैं और मंत्री का पक्ष ले लिया है।समाज का कहना है कि अपनी गलती के लिए विजय शाह चार बार सार्वजनिक रूप से माफी मांग चुके हैं, इसलिए अब इस मामले को ज्यादा तूल नहीं देना चाहिए और मामले को खत्म कर देना चाहिए
विजय शाह के समर्थन में अब आदिवासी समाज और छात्र संगठन
जनजातीय कार्यमंत्री कुंवर विजय शाह के बयान से उपजे विवाद को लेकर अब आदिवासी समाज और छात्र संगठन ने उनके पक्ष में मोर्चा खोल दिया है। शुक्रवार को विजय शाह मित्र मंडल और अजा-जजा के साथ ही अन्य पिछड़ा वर्ग छात्र संघ ने कलेक्ट्रेट पहुंचकर राष्ट्रपति, प्रधानमंत्री और राज्यपाल के नाम ज्ञापन सौंपा है। समाज के युवाओं का कहना है कि मंत्री शाह भाषाई त्रुटि के लिए चार बार सार्वजनिक तौर से माफी मांग चुके हैं, इसलिए उनकी जनता के प्रति सेवा और वरिष्ठता को देखते हुए ये मामला समाप्त कर देना चाहिए।
प्रदर्शनकारी बोले- एक गलती से 40 साल के संघर्ष को नही आंका जा सकता
आदिवासी समाज, छात्र संगठन और ओबीसी वर्ग के प्रदर्शनकारियों ने कहा है कि विजय शाह आदिवासी समाज के सर्वमान्य नेता हैं, लगातार आठ बार से विधायक चुने गए हैं, यह उनकी लोकप्रियता और जनसेवा का प्रमाण है। रविंद्र आदिवासी, बुद्धि आदिवासी, उदयभान आदिवासी, नरेंद्र बंजारा का कहना है कि शाह की शुरू की गई योजनाएं आज भी जनता के लिए हितकारी हैं। इसलिए अनजाने में हुई एक भाषाई त्रुटि के कारण गलत ठहराकर नजरअंदाज नहीं किया जाना चाहिए।
जब मंत्री ने 4 बार माफी भी मांग ली तो विवाद क्यों?
ज्ञापन सौंपने के दौरान प्रदर्शनकारियों ने कहा कि मंत्री शाह ने गलती के लिए एक बार नहीं बल्कि 4 बार माफी मांगी है। अगर कोई चार बार सार्वजनिक मंचों से माफी मांगता है तो फिर मामले को तूल नहीं देना चाहिए । इसलिए आदिवासी समाज की जनभावनाओं का सम्मान करते हुए राष्ट्रपति से इस विवाद को समाप्त करने और मागी को स्वीकार करने का अनुरोध किया गया है।