Edited By meena, Updated: 27 Jan, 2026 11:55 AM

योगी सरकार और स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद के बीच चल रही खींचतान को लेकर अब भाजपा दो गुटों में बंटती दिखाई दे रही है। मध्य प्रदेश की पूर्व मुख्यमंत्री और भाजपा की फायर ब्रांड नेत्री उमा भारती ने...
भोपाल : योगी सरकार और स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद के बीच चल रही खींचतान को लेकर अब भाजपा दो गुटों में बंटती दिखाई दे रही है। मध्य प्रदेश की पूर्व मुख्यमंत्री और भाजपा की फायर ब्रांड नेत्री उमा भारती ने योगी सरकार द्वारा शंकराचार्य होने के सबूत मांगे जाने पर सवाल उठाए हैं। उन्होंने सोशल मीडिया के जरिए इसे प्रशासन के अधिकारों और मर्यादाओं की उल्लंघन बताया है।
उमा भारती ने एक्स पर पोस्ट करते हुए अविमुक्तेश्वरानंद और यूपी सरकार के बीच चल रहे तकरार का सकारात्मक समाधान निकलने की उम्मीद जताई है। भाजपा नेत्री ने शंकराचार्य से सबूत मांगने की आलोचना करते हुए इसे गलत बताया है। उन्होंने सीएम योगी के दफ्तर और ज्योतिमठ को टैग करते हुए लिखा- मुझे विश्वास है कि स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद जी महाराज एवं उत्तर प्रदेश सरकार के बीच कोई सकारात्मक समाधान निकल आएगा किंतु प्रशासनिक अधिकारियों के द्वारा शंकराचार्य होने का सबूत मांगना, यह प्रशासन ने अपनी मर्यादाओं एवं अधिकारों का उल्लंघन किया है, यह अधिकार तो सिर्फ शंकराचार्यों का एवं विद्वत परिषद का है।
बता दें कि मौनी अमावस्या पर रथ से स्नान के लिए जाने के बाद हुए विवाद के बाद से स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद अनशन कर रहे हैं। इसके बाद से सियासी गलियारों में हड़कंप मचा हुआ है। वहीं प्रयागराज मेला प्राधिकरण ने उच्चतम न्यायालय के नोटिस का हवाला देते हुए स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद से नोटिस देकर जवाब मांगे जाने पर मामले ने और तूल पकड़ लिया है। इसके बाद अन्य तीन शंकराचार्यों ने भी उन्हें अपना समर्थन दिया। इसके बाद सरकार की तीखी आलोचना हो रही है, वहीं विपक्ष भी इस मामले को लेकर सरकार पर हमलावर रुख अपना रहा है।