Edited By Himansh sharma, Updated: 30 May, 2026 11:55 AM

प्रदेश सरकार जहां सुशासन तिहार के माध्यम से आम जनता की समस्याओं का त्वरित समाधान करने का दावा कर रही है
दुर्ग। प्रदेश सरकार जहां सुशासन तिहार के माध्यम से आम जनता की समस्याओं का त्वरित समाधान करने का दावा कर रही है, वहीं दुर्ग जिले के थनौद गांव से सामने आए एक वीडियो ने पूरे अभियान की कार्यशैली पर सवाल खड़े कर दिए हैं। शिकायतों के निराकरण को लेकर आयोजित कार्यक्रम उस समय विवादों में घिर गया, जब एक भाजपा कार्यकर्ता और जनपद पंचायत CEO के बीच तीखी बहस हो गई। देखते ही देखते मामला इतना बढ़ा कि कार्यक्रम का माहौल तनावपूर्ण हो गया।
प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, भाजपा कार्यकर्ता अपनी शिकायत के समाधान की मांग को लेकर अधिकारियों के पास पहुंचे थे। इसी दौरान जवाब से असंतुष्ट कार्यकर्ता और जनपद CEO के बीच कहासुनी शुरू हो गई। वायरल वीडियो में अधिकारी को गुस्से में कार्यकर्ता की ओर उंगली दिखाते हुए यह कहते सुना जा सकता है कि, तुम्हें जो करना है कर लो। इसके बाद मौके पर मौजूद लोगों के बीच भी चर्चा का माहौल बन गया।
सबसे ज्यादा चर्चा इस बात की हो रही है कि पूरा घटनाक्रम दुर्ग ग्रामीण विधायक ललित चंद्राकर की मौजूदगी में हुआ। वीडियो में विधायक घटनास्थल पर खड़े नजर आते हैं, लेकिन विवाद बढ़ने के बावजूद उन्होंने कोई हस्तक्षेप नहीं किया। न तो दोनों पक्षों को शांत कराने का प्रयास किया गया और न ही मामले को तत्काल सुलझाने की पहल दिखाई दी।
सुशासन तिहार का उद्देश्य जनता और प्रशासन के बीच संवाद स्थापित कर समस्याओं का समाधान करना है, लेकिन थनौद की घटना ने इस उद्देश्य पर ही प्रश्नचिह्न लगा दिया है। अब सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे वीडियो को लेकर लोगों की अलग-अलग प्रतिक्रियाएं सामने आ रही हैं। कुछ लोग अधिकारी के व्यवहार को अनुचित बता रहे हैं, तो कुछ विधायक की चुप्पी पर सवाल उठा रहे हैं।
फिलहाल यह मामला जिले में चर्चा का विषय बना हुआ है। विपक्षी दलों और स्थानीय लोगों के बीच भी इसे लेकर बहस तेज हो गई है कि जब जनता की शिकायतें सुनने के लिए विशेष अभियान चलाया जा रहा है, तब ऐसे विवाद प्रशासनिक संवेदनशीलता और जवाबदेही पर क्या संदेश देते हैं। सुशासन तिहार के मंच पर हुआ यह विवाद अब केवल एक बहस नहीं, बल्कि प्रशासन और जनप्रतिनिधियों की भूमिका को लेकर उठे बड़े सवालों का विषय बन गया है।