Edited By Himansh sharma, Updated: 07 Feb, 2026 11:49 AM

मध्यप्रदेश भाजपा में निगम-मंडल और राजनीतिक नियुक्तियों को लेकर चल रहा इंतजार फिलहाल खत्म होता नजर नहीं आ रहा है।
भोपाल। मध्यप्रदेश भाजपा में निगम-मंडल और राजनीतिक नियुक्तियों को लेकर चल रहा इंतजार फिलहाल खत्म होता नजर नहीं आ रहा है। इसकी वजह सिर्फ देरी नहीं, बल्कि संगठन के स्तर पर लिया गया एक बड़ा फैसला है। नए राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नबीन के कार्यभार संभालते ही पार्टी ने नियुक्तियों की पूरी प्रक्रिया को दोबारा शुरू करने का संकेत दे दिया है।
सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार पहले जिन नामों पर मंथन चल रहा था, उन्हें फिलहाल होल्ड पर डाल दिया गया है। राष्ट्रीय संगठन ने प्रदेश नेतृत्व से नई सूची तैयार कर भेजने को कहा है, ताकि संगठनात्मक संतुलन और भविष्य की रणनीति के हिसाब से नियुक्तियां तय की जा सकें।
दिल्ली में क्या संदेश लेकर गए हेमंत खंडेलवाल? प्रदेश भाजपा अध्यक्ष हेमंत खंडेलवाल हाल ही में दिल्ली दौरे पर रहे, जहां उन्होंने राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नबीन के साथ संगठन की जमीनी स्थिति, कार्यकर्ताओं की भूमिका और आगामी राजनीतिक एजेंडे पर विस्तार से चर्चा की। इस बातचीत में साफ संकेत मिला कि निगम-मंडलों की नियुक्तियां अब जल्दबाजी में नहीं होंगी।
सूत्रों का कहना है कि खंडेलवाल ने दिल्ली में यह भी बताया कि प्रदेश में संगठन को और मजबूत करने के लिए नियुक्तियों में नए चेहरों और क्षेत्रीय संतुलन पर विशेष ध्यान देना जरूरी है। इसी कारण सूची को नए सिरे से तैयार करने का निर्णय लिया गया।
मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव भी हाल ही में दिल्ली प्रवास से लौटे हैं। ऐसे में माना जा रहा है कि सरकार और संगठन के बीच समन्वय के बाद ही अंतिम नामों पर मुहर लगेगी।
बीएल संतोष की मौजूदगी से बढ़ा राजनीतिक संकेत
इसी बीच भाजपा के राष्ट्रीय महामंत्री (संगठन) बीएल संतोष के मध्यप्रदेश दौरे ने राजनीतिक हलकों में हलचल बढ़ा दी है। भोपाल एयरपोर्ट पर केंद्रीय मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया, प्रदेश प्रभारी महेंद्र सिंह और मध्यक्षेत्र बौद्धिक प्रमुख हितानंद के साथ उनकी मुलाकात को महज औपचारिक नहीं माना जा रहा।पार्टी के जानकारों के मुताबिक, यह मुलाकात आने वाले दिनों में होने वाली राजनीतिक नियुक्तियों और संगठनात्मक बदलावों से जुड़ी रणनीति का हिस्सा हो सकती है।
क्या है आगे का रास्ता?
फिलहाल इतना तय है कि मध्यप्रदेश में निगम-मंडल और राजनीतिक नियुक्तियों की प्रक्रिया अब नए सिरे से आगे बढ़ेगी। जब तक राष्ट्रीय नेतृत्व अंतिम रूप से हरी झंडी नहीं देता, तब तक दावेदारों का इंतजार बना रहेगा।