गांवों से दूरी या लापरवाही? MP ब्यूरोक्रेसी की खुली पोल, 90% कलेक्टरों ने नहीं किया फील्ड स्टे

Edited By Himansh sharma, Updated: 19 Apr, 2026 09:23 PM

mp bureaucracy faces heat over village stay failure

मध्यप्रदेश में सुशासन और जनसंवाद को मजबूत करने के लिए सरकार द्वारा शुरू किए गए प्रयासों पर अब सवाल उठने लगे हैं।

भोपाल। मध्यप्रदेश में सुशासन और जनसंवाद को मजबूत करने के लिए सरकार द्वारा शुरू किए गए प्रयासों पर अब सवाल उठने लगे हैं। मुख्यमंत्री और मुख्य सचिव अनुराग जैन के स्पष्ट निर्देशों के बावजूद अधिकांश जिलों में कलेक्टर और पुलिस अधीक्षक स्तर के अधिकारी गांवों में रात्रि विश्राम और चौपाल कार्यक्रमों से दूरी बनाए हुए हैं।

सूत्रों के अनुसार, राज्य के लगभग 90 प्रतिशत जिलों में अधिकारी गांवों में रुककर जनसुनवाई और समस्याओं के समाधान की पहल को अपेक्षित गंभीरता से नहीं ले रहे हैं। मुख्यमंत्री की मंशा थी कि अधिकारी फील्ड में उतरकर सीधे ग्रामीणों से संवाद करें और मौके पर ही समस्याओं का समाधान सुनिश्चित करें, लेकिन जमीनी हकीकत इसके उलट दिखाई दे रही है।

प्रशासनिक हलकों में यह भी चर्चा है कि कई अधिकारी गांवों के दौरे को औपचारिकता तक सीमित रख रहे हैं। कुछ मामलों में जनसमस्याओं के समाधान से अधिक ध्यान फोटो और वीडियो कवरेज पर केंद्रित होने की बात भी सामने आ रही है। इससे ग्रामीण स्तर पर योजनाओं के प्रभावी क्रियान्वयन पर असर पड़ने की आशंका जताई जा रही है।

सख्त निर्देशों के बावजूद सुस्ती

मुख्य सचिव द्वारा सभी जिलों को स्पष्ट निर्देश दिए गए थे कि अधिकारी नियमित रूप से फील्ड विजिट करें और गांवों में रात्रि विश्राम कर जनता से सीधा संवाद स्थापित करें। इसके बावजूद मैदानी अमले की सुस्ती जारी है। जिला पंचायत सीईओ और जनपद स्तर के अधिकारियों की अनुपस्थिति भी कई स्थानों पर सामने आई है। हाल ही में सीधी जिले के तत्कालीन कलेक्टर पर हुई कार्रवाई के बाद उम्मीद जताई जा रही थी कि अन्य जिलों में स्थिति सुधरेगी, लेकिन व्यापक बदलाव अभी भी नजर नहीं आ रहा है।

कुछ जिलों में दिख रही सक्रियता

हालांकि, कुछ अधिकारी इस दिशा में उदाहरण भी पेश कर रहे हैं। रीवा कलेक्टर द्वारा ग्रामीण क्षेत्रों में पहुंचकर जनसंवाद किया गया, जबकि बड़वानी में कलेक्टर ने कन्या आश्रम में रात्रि विश्राम कर चर्चा बटोरी। टीकमगढ़ में चौपाल के जरिए समस्याओं का समाधान किया गया और निवाड़ी में पेंशन व पीडीएस से जुड़ी शिकायतों का मौके पर निपटारा हुआ।
सीधी और विदिशा जिलों में भी कुछ अधिकारियों की सक्रियता लगातार देखने को मिल रही है, जो सीधे जनता के बीच जाकर समस्याओं को सुन रहे हैं।

सवाल बरकरार

इन चुनिंदा प्रयासों के बावजूद बड़ा सवाल यही है कि क्या बाकी जिलों में भी इसी तरह की सक्रियता देखने को मिलेगी, या फिर सरकार की ‘जनसंवाद’ और ‘गांव केंद्रित प्रशासन’ की नीति केवल कागजों तक ही सीमित रह जाएगी।

Related Story

Trending Topics

img title
img title

Be on the top of everything happening around the world.

Try Premium Service.

Subscribe Now!