डोंगरगढ़ में बड़ा शिक्षा घोटाला! 2 साल तक बिना मान्यता चला स्कूल, छात्रों को फर्जी तरीके से दिलाई बोर्ड परीक्षा

Edited By Himansh sharma, Updated: 31 May, 2026 08:12 PM

school accused of using another school s udise code

शिक्षा के क्षेत्र में नियमों और मानकों की अनदेखी कर आर्थिक लाभ कमाने की होड़ किस हद तक पहुंच चुकी है

डोंगरगढ़। (हेमंत पाल ): शिक्षा के क्षेत्र में नियमों और मानकों की अनदेखी कर आर्थिक लाभ कमाने की होड़ किस हद तक पहुंच चुकी है, इसका गंभीर मामला राजनांदगांव जिले के डोंगरगढ़ विकासखंड अंतर्गत ग्राम ढारा में सामने आया है। यहां संचालित आदर्श पब्लिक स्कूल पर बिना मान्यता के स्कूल संचालन करने और दूसरे विद्यालय के यूडीआईएसई कोड का कथित दुरुपयोग कर विद्यार्थियों को परीक्षा दिलाने का आरोप लगा है। मामले की शिकायत के बाद भी कार्रवाई में देरी होने से सरस्वती शिशु मंदिर प्रबंधन में नाराजगी बढ़ गई है और इसकी जानकारी प्रदेश के शिक्षा मंत्री तक पहुंचा दी गई है।

जानकारी के अनुसार ग्राम ढारा में संचालित आदर्श पब्लिक स्कूल पिछले दो वर्षों से बिना वैधानिक अनुमति के कक्षा पहली से पांचवीं तक का संचालन कर रहा था। विद्यालय का नाम शासन के आधिकारिक पोर्टल और शैक्षणिक रिकॉर्ड में दर्ज नहीं होने के कारण संस्था को पांचवीं बोर्ड परीक्षा में विद्यार्थियों को शामिल कराने में परेशानी हुई। आरोप है कि इसी स्थिति से बचने के लिए विद्यालय प्रबंधन ने ग्राम ढारा स्थित सरस्वती शिशु मंदिर के यूडीआईएसई कोड (22090612802) का उपयोग बिना अनुमति कर विद्यार्थियों को केंद्रीकृत परीक्षा 2025-26 में शामिल करा दिया।

बिना अनुमति इस्तेमाल हुआ यूडीआईएसई कोड

सरस्वती शिशु मंदिर प्रबंधन का कहना है कि विद्यालय की जानकारी और अनुमति के बिना उनके यूडीआईएसई कोड का उपयोग किया गया। इतना ही नहीं, शाला प्रबंधन समिति से भी कोई अनुमति नहीं ली गई। शिकायत में कहा गया है कि यह कार्य पूरी तरह नियम विरुद्ध है और इससे विद्यालय की साख तथा शासकीय रिकॉर्ड प्रभावित हो सकते हैं।

PunjabKesariफर्जी अंकसूची जारी करने का भी आरोप

मामले को और गंभीर बनाते हुए सरस्वती शिशु मंदिर प्रबंधन ने आरोप लगाया है कि आदर्श पब्लिक स्कूल द्वारा विद्यार्थियों को जो अंकसूची प्रदान की गई है, उसमें कई अनियमितताएं हैं। अंकसूची में दूसरे विद्यालय का यूडीआईएसई कोड दर्ज है, जबकि विद्यार्थियों के पेन नंबर और अपार आईडी जैसी महत्वपूर्ण जानकारियां नहीं हैं। इतना ही नहीं, अंकसूची में संस्था प्रमुख के हस्ताक्षर और अधिकृत सील-मोहर का भी अभाव है। इससे दस्तावेजों की वैधता पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं।

कार्रवाई में देरी से बढ़ा आक्रोश

शिकायत दर्ज होने के बाद भी अब तक किसी ठोस कार्रवाई के अभाव में सरस्वती शिशु मंदिर प्रबंधन में नाराजगी बढ़ती जा रही है। विद्यालय के प्राचार्य प्रकाश यादव ने डोंगरगढ़ प्रवास पर पहुंचे जिले के प्रभारी मंत्री एवं प्रदेश के शिक्षा मंत्री को पूरे मामले से अवगत कराते हुए निष्पक्ष जांच और दोषियों पर कठोर कार्रवाई की मांग की है।

प्राचार्य का कहना है कि यह केवल एक विद्यालय का मामला नहीं है, बल्कि बच्चों के भविष्य और शिक्षा व्यवस्था की विश्वसनीयता से जुड़ा गंभीर विषय है। यदि ऐसे मामलों पर समय रहते कार्रवाई नहीं हुई तो भविष्य में अन्य संस्थाएं भी नियमों की अनदेखी कर सकती हैं।

PunjabKesariमंगलवार तक मांगी गई जांच रिपोर्ट

जिला शिक्षा अधिकारी प्रवास सिंह बघेल ने शिकायत मिलने की पुष्टि करते हुए बताया कि मामले की जांच के लिए विकासखंड शिक्षा अधिकारी डोंगरगढ़ को निर्देश दिए गए हैं। उन्होंने कहा कि मंगलवार तक जांच रिपोर्ट प्रस्तुत करने के लिए कहा गया है और यदि आरोप सही पाए जाते हैं तो दोषियों के विरुद्ध नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी। "दोषियों को किसी भी स्थिति में बख्शा नहीं जाएगा," उन्होंने स्पष्ट किया।

क्या है यूडीआईएसई कोड और क्यों है महत्वपूर्ण?

यूडीआईएसई (Unified District Information System for Education) कोड भारत के प्रत्येक विद्यालय को दिया जाने वाला 11 अंकों का विशिष्ट पहचान नंबर है। इसके माध्यम से विद्यालय की मान्यता, भौगोलिक स्थिति, छात्र संख्या, आधारभूत सुविधाएं और अन्य शैक्षणिक जानकारी दर्ज रहती है। छात्रवृत्ति, बोर्ड परीक्षा, छात्र स्थानांतरण और शैक्षणिक योजनाओं के संचालन में इसकी महत्वपूर्ण भूमिका होती है। किसी अन्य विद्यालय के यूडीआईएसई कोड का उपयोग करना न केवल प्रशासनिक अनियमितता है, बल्कि शिक्षा व्यवस्था की पारदर्शिता पर भी प्रश्नचिह्न खड़ा करता है।

अब सभी की निगाहें जांच रिपोर्ट पर टिकी हैं। यदि आरोप सही साबित होते हैं तो यह मामला जिले में शिक्षा व्यवस्था की निगरानी और निजी स्कूलों के संचालन पर बड़े सवाल खड़े कर सकता है।

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