Edited By Himansh sharma, Updated: 31 Jan, 2026 02:36 PM

छत्तीसगढ़ के खैरागढ़ जिले के बफरा गांव से ताल्लुक रखने वाले छत्तीसगढ़ी फिल्म कलाकार ज्ञानेश कौशल के आकस्मिक निधन की खबर ने पूरे छलीबुड और कला जगत को गहरे शोक में डुबो दिया है।
खैरागढ़: (हेमंत पाल): छत्तीसगढ़ के खैरागढ़ जिले के बफरा गांव से ताल्लुक रखने वाले छत्तीसगढ़ी फिल्म कलाकार ज्ञानेश कौशल के आकस्मिक निधन की खबर ने पूरे छलीबुड और कला जगत को गहरे शोक में डुबो दिया है। बताया जा रहा है कि हृदय गति रुकने से उनका निधन हुआ। उनके असमय चले जाने से न केवल फिल्मी दुनिया, बल्कि उनका गांव और चाहने वाले स्तब्ध हैं।
ज्ञानेश कौशल, प्रसिद्ध मानसकार भुवन कौशल के पुत्र थे। कला और संस्कार उन्हें विरासत में मिले थे। बचपन से ही उनमें अभिनय और प्रस्तुति की झलक दिखाई देती थी, जिसे उन्होंने समय के साथ निखारा। ज्ञानेश ने अपने करियर की शुरुआत टिक टॉक जैसे छोटे डिजिटल प्लेटफॉर्म से की थी। सीमित संसाधनों के बावजूद उन्होंने अपनी प्रतिभा के दम पर पहचान बनाई और धीरे-धीरे छत्तीसगढ़ी सिनेमा तक का सफर तय किया। उनकी यह यात्रा आज के युवाओं के लिए एक बड़ी प्रेरणा रही कि मेहनत और जुनून हो तो छोटे मंच भी बड़े सपनों का रास्ता बन सकते हैं।
उन्होंने छत्तीसगढ़ी सिनेमा के चर्चित नाम अमलेश नागेश के साथ अपने फिल्मी करियर की शुरुआत की। अमलेश नागेश और ज्ञानेश कौशल केवल सह-कलाकार ही नहीं, बल्कि परम मित्र भी थे। दोनों ने साथ संघर्ष किया, साथ आगे बढ़े और छलीबुड में अपनी अलग पहचान बनाई। ज्ञानेश के निधन से अमलेश नागेश सहित उनके करीबी मित्रों और सहकर्मियों को गहरा आघात पहुंचा है।
ज्ञानेश कौशल की मौत की खबर जैसे ही बफरा गांव पहुंची, पूरे गांव में मातम छा गया। घर-परिवार का रो-रोकर बुरा हाल है। गांव के लोग उन्हें सिर्फ एक कलाकार नहीं, बल्कि अपने बीच से निकला हुआ एक होनहार बेटा मानते थे।
छत्तीसगढ़ी फिल्म जगत के कलाकारों, निर्देशकों और प्रशंसकों ने सोशल मीडिया और व्यक्तिगत संदेशों के माध्यम से शोक संवेदनाएं व्यक्त की हैं। हर कोई यही कह रहा है कि ज्ञानेश का जाना छलीबुड के लिए एक अपूरणीय क्षति है। कम उम्र में इतना मुकाम हासिल करने वाले ज्ञानेश कौशल आज भले ही हमारे बीच नहीं हैं, लेकिन उनकी मेहनत, उनका संघर्ष और उनकी मुस्कान आने वाली पीढ़ियों को हमेशा प्रेरित करती रहेगी।