बालाघाट नगर पालिका में 'बगावत', BJP पार्षदों ने अपनी ही अध्यक्ष को घेरा, भ्रष्टाचार के आरोपों पर हाईकोर्ट का बड़ा एक्शन

Edited By Vikas Tiwari, Updated: 01 Feb, 2026 02:28 PM

rebellion  in balaghat municipality hc takes action on corruption allegations

जिले की नगर पालिका इन दिनों प्रशासनिक कामकाज से ज्यादा राजनीतिक विवादों को लेकर सुर्खियों में है। नगरपालिका अध्यक्ष पर लगे कथित भ्रष्टाचार के आरोपों को लेकर दायर याचिका पर सुनवाई करते हुए हाईकोर्ट ने राज्य सरकार को बड़ा निर्देश दिया है। अदालत ने...

बालाघाट: जिले की नगर पालिका इन दिनों प्रशासनिक कामकाज से ज्यादा राजनीतिक विवादों को लेकर सुर्खियों में है। नगरपालिका अध्यक्ष पर लगे कथित भ्रष्टाचार के आरोपों को लेकर दायर याचिका पर सुनवाई करते हुए हाईकोर्ट ने राज्य सरकार को बड़ा निर्देश दिया है। अदालत ने मामले की विधिवत जांच 90 दिनों के भीतर पूरी कराने के आदेश दिए हैं। हाईकोर्ट के इस निर्देश के बाद न केवल नगर पालिका की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े हो गए हैं, बल्कि सत्ताधारी दल के भीतर चल रही अंदरूनी खींचतान भी खुलकर सामने आ गई है।

सत्ताधारी पार्षद ही पहुंचे कोर्ट
इस पूरे मामले में सबसे चौंकाने वाली बात यह है कि याचिका विपक्ष ने नहीं, बल्कि सत्ताधारी दल BJP के पार्षदों ने ही दायर की है। याचिकाकर्ता पार्षदों का कहना है कि उन्होंने पहले संगठन स्तर पर और वरिष्ठ नेताओं से शिकायत की, लेकिन कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई। मजबूर होकर उन्हें निष्पक्ष जांच के लिए न्यायालय की शरण लेनी पड़ी।

पहले भी लगते रहे हैं आरोप
नगरपालिका अध्यक्ष पर इससे पहले भी अपने कार्यकाल के दौरान कई तरह के आरोप लगते रहे हैं। इनमें डीजल उपयोग में कथित गड़बड़ी, नगर पालिका वाहनों की खरीद में अनियमितता और रैनबसेरा के फर्नीचर के निजी उपयोग जैसे मामले शामिल बताए जाते हैं। हालिया याचिका में भी इन्हीं बिंदुओं को आधार बनाकर सवाल उठाए गए हैं, हालांकि इन आरोपों की अभी जांच होना बाकी है।

राजनीतिक मुलाकात से बढ़ी हलचल
हाईकोर्ट के निर्देश सार्वजनिक होने के तुरंत बाद नगरपालिका अध्यक्ष भारती ठाकुर की एक पूर्व मंत्री से मुलाकात ने राजनीतिक चर्चाओं को और हवा दे दी है। राजनीतिक गलियारों में इस मुलाकात को मौजूदा विवाद से जोड़कर देखा जा रहा है, हालांकि इस पर किसी पक्ष की आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है।

अध्यक्ष ने दी सफाई
नगरपालिका अध्यक्ष भारती ठाकुर ने मीडिया को जारी बयान में कहा कि उन्हें अभी तक अदालत से कोई नोटिस प्राप्त नहीं हुआ है और न ही उन्हें पक्षकार के रूप में सुना गया है। उन्होंने स्पष्ट किया कि कोर्ट ने उनके खिलाफ कोई दोष सिद्ध नहीं किया है, बल्कि सक्षम अधिकारी को सभी पक्षों को सुनकर तय समय-सीमा में निर्णय लेने का निर्देश दिया है। वाहन उपयोग को लेकर उठे सवालों पर उन्होंने सफाई देते हुए कहा कि जबलपुर और भोपाल आने-जाने में इस्तेमाल होने वाला इनोवा वाहन उनके परिवार की निजी संपत्ति है। उन्होंने दावा किया कि वाहन का उपयोग नगर हित और प्रशासनिक कार्यों के लिए किया जाता है, जबकि ईंधन की व्यवस्था नगर पालिका कर्मचारी नियमों के तहत करते हैं।

90 दिन की समय-सीमा पर टिकी निगाहें
फिलहाल पूरे मामले में सबकी नजर हाईकोर्ट द्वारा तय की गई 90 दिन की समय-सीमा पर है, जिसके भीतर जांच पूरी कर रिपोर्ट पेश की जानी है। इस जांच के नतीजे न सिर्फ नगर पालिका प्रशासन बल्कि जिले की राजनीति की दिशा भी तय कर सकते हैं।

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