ईडी की बड़ा एक्शन! CGPSC-DMF घोटाले में 2 आरोपी गिरफ्तार, छाबड़ा पर 30 करोड़ कमीशन लेने के आरोप

Edited By meena, Updated: 02 Sep, 2026 12:42 PM

two accused arrested in the cgpsc dmf scam

छत्तीसगढ़ में प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने कथित छत्तीसगढ़ लोक सेवा आयोग (सीजीपीएससी) और डीएमएफ घोटालों से जुड़े धनशोधन मामलों में मंगलवार को बड़ी कारर्वाई करते हुए आरोपी उत्कर्ष चंद्राकर...

रायपुर : छत्तीसगढ़ में प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने कथित छत्तीसगढ़ लोक सेवा आयोग (सीजीपीएससी) और डीएमएफ घोटालों से जुड़े धनशोधन मामलों में मंगलवार को बड़ी कारर्वाई करते हुए आरोपी उत्कर्ष चंद्राकर और सतपाल सिंह छाबड़ा को गिरफ्तार कर रायपुर की विशेष अदालत में पेश किया जहां से उन्हें पांच सितंबर तक पुलिस हिरासत में भेज दिया गया। ईडी के अधिवक्ता सौरभ पांडेय के अनुसार जांच के दौरान नए प्रमाण सामने आए हैं। उन्होंने बताया कि सतपाल सिंह छाबड़ा पर डीएमएफ घोटाले में करीब 30 करोड़ रुपए कमीशन लेने का आरोप है। वहीं सीजीपीएससी मामले में उत्कर्ष चंद्राकर पर अलग-अलग उम्मीदवारों से तीन करोड़ 11 लाख रुपए लेने का आरोप है। आरोप है कि उत्कर्ष ने कई लोगों को लालच दिया कि उप कलेक्टर पद पर चयन नहीं हुआ तो उन्हें वन विभाग में पोस्टिंग दिलाई जाएगी। इस बीच ईडी ने कल प्रदेश में सात स्थानों पर छापेमारी की। कारर्वाई के दायरे में पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल के निजी सहायक रहे केके चंद्रवंशी, पूर्व ओएसडी चेतन बोरघारिया और पूर्व पटवारी कमलेश सिंह राजपूत के ठिकाने भी शामिल रहे। दुर्ग में दो ठिकानों पर जांच की गई। 

भिलाई में केके चंद्रवंशी के आवास पर ईडी की टीम सुबह करीब छह बजे दो-तीन गाड़ियों से पहुंची और दस्तावेजों सहित अन्य सामग्री की जांच की। कारर्वाई के दौरान घर के बाहर पुलिस बल तैनात रहा।  दुर्ग के सिकोला भाठा की बंगाली कॉलोनी स्थित कमलेश राजपूत के घर भी ईडी ने छापेमारी की। पटवारी संघ के प्रदेश पदाधिकारी रह चुके राजपूत के घर करीब आठ अधिकारियों की टीम दो गाड़ियों से पहुंची थी। जांच के दौरान राजपूत के परिवार के सदस्यों की सरकारी पदों पर नियुक्तियों से जुड़े पहलुओं को भी खंगाला गया। उनकी दो बेटियां पटवारी, एक बेटी उपपंजीयक और बेटा नायब तहसीलदार हैं।

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पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल के ओएसडी रहे चेतन बोरघारिया के दो ठिकानों पर भी ईडी ने कारर्वाई की। वर्तमान में बोरघारिया बलरामपुर के अपर कलेक्टर हैं। बलरामपुर के सकिर्ट हाउस में उनसे पूछताछ की गई, जबकि धमतरी के अमलतास पुरम स्थित उनके आवास पर टीम ने दस्तावेजों की जांच की।  

इसी सीजीपीएससी मामले में कल उच्चतम न्यायालय ने तत्कालीन परीक्षा नियंत्रक आरती वासनिक और उप परीक्षा नियंत्रक ललित गनवीर को जमानत दी है। ईडी की मौजूदा कारर्वाई आयोग के पूर्व चेयरमैन टामन सिंह सोनवानी की 25 जुलाई को गिरफ्तारी के बाद सामने आई है। सोनवानी को परीक्षा के प्रश्नपत्र लीक मामले में मनी लॉन्ड्रिंग जांच से जुड़े केस में गिरफ्तार किया गया था। जांच वर्ष 2020 और 2021 की आयोग राज्य सेवा परीक्षाओं में कथित प्रश्नपत्र लीक और अनियमितताओं से संबंधित है। ईडी ने वर्ष 2024 में सीबीआई की ओर से दर्ज प्राथमिकी के आधार पर मनी लॉन्ड्रिंग की जांच शुरू की थी। 

ईडी का आरोप है कि सोनवानी ने अवैध तरीके से प्रश्नपत्र लीक कराने और चयन प्रक्रिया में हेरफेर करने में मदद की। इसके बदले रिश्वत ली गई और इसका फायदा उनके रिश्तेदारों तथा पैसे देने वाले उम्मीदवारों को मिला।  इससे पहले सीबीआई ने भी आयोग के पूर्व चेयरमैन टामन सिंह सोनवानी को गिरफ्तार किया था। उनके साथ बजरंग पावर एंड इस्पात लिमिटेड के डायरेक्टर श्रवण कुमार गोयल को भी गिरफ्तार किया गया था। सीबीआई का आरोप है कि आयोग की भर्ती प्रक्रिया में अनियमितताएं हुईं और कथित तौर पर प्रभावशाली लोगों के रिश्तेदारों को उप कलेक्टर, डीएसपी समेत अन्य पदों पर चयनित कराने के लिए अवैध लेन-देन किया गया। 

सीबीआई के मुताबिक सोनवानी के कार्यकाल में आयोग की भर्ती में बड़े पैमाने पर गड़बड़ी हुई। आरोप है कि उन्होंने अपने कई करीबी रिश्तेदारों तथा कांग्रेस नेताओं और अधिकारियों के 18 रिश्तेदारों की नौकरी लगवाई। जांच एजेंसी का दावा है कि जांच में पैसों के लेन-देन से संबंधित साक्ष्य मिले हैं।  एजेंसी की जांच के अनुसार टामन सिंह सोनवानी ने परीक्षा के पर्चे अपने घर पर साहिल, नीतेश, उसकी पत्नी निशा कोसले और दीपा आडिल को दिए। इसके बाद उप परीक्षा नियंत्रक ललित गणवीर ने कथित रूप से लीक हुआ पेपर बजरंग पावर एंड इस्पात कंपनी के डायरेक्टर श्रवण गोयल को सौंपा।  

सीबीआई का आरोप है कि श्रवण गोयल के बेटे शशांक और बहू भूमिका ने इसी लीक पेपर से तैयारी की और दोनों उप कलेक्टर बने। आयोग से जुड़ा यह मामला वर्ष 2020 से 2022 के बीच हुई भर्ती प्रक्रियाओं में कथित अनियमितताओं से संबंधित है। आरोप है कि आयोग की परीक्षाओं और साक्षात्कार में पारदर्शिता को दरकिनार कर राजनीतिक और प्रशासनिक रसूख वाले परिवारों के उम्मीदवारों को उच्च पदों पर चयनित कराया गया। उप कलेक्टर, डीएसपी और अन्य राजपत्रित पदों की चयन प्रक्रिया को लेकर सवाल उठने के बाद राज्य सरकार ने मामले की जांच सीबीआई को सौंपी थी। जांच एजेंसी विभिन्न चरणों में छापेमारी कर दस्तावेज और अन्य साक्ष्य जुटा रही है। आयोग की परीक्षा 2021 में कुल 171 पदों के लिए भर्ती प्रक्रिया आयोजित की गई थी। प्रारंभिक परीक्षा 13 फरवरी 2022 को हुई, जिसमें 2 हजार 565 अभ्यर्थी सफल हुए थे। इसके बाद 26, 27, 28 और 29 मई 2022 को आयोजित मुख्य परीक्षा में 509 अभ्यर्थी सफल हुए। साक्षात्कार के बाद 11 मई 2023 को 170 अभ्यर्थियों की चयन सूची जारी की गई थी।

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