Edited By Himansh sharma, Updated: 13 Feb, 2026 12:17 PM

छत्तीसगढ़ के पूर्व मुख्यमंत्री और कांग्रेस के वरिष्ठ नेता Bhupesh Baghel ने केंद्र सरकार और बीजेपी पर गंभीर आरोप लगाते हुए सियासी हलचल तेज कर दी है।
रायपुर। छत्तीसगढ़ के पूर्व मुख्यमंत्री और कांग्रेस के वरिष्ठ नेता Bhupesh Baghel ने केंद्र सरकार और बीजेपी पर गंभीर आरोप लगाते हुए सियासी हलचल तेज कर दी है। बघेल ने दावा किया कि केंद्रीय गृह मंत्री Amit Shah ने उन्हें फोन किया था और उनके खिलाफ चल रहे मामलों पर चर्चा की थी। उनका आरोप है कि इस बातचीत का मकसद उन्हें दबाव में लेकर बीजेपी में शामिल होने के लिए राजी करना था।
‘फोन आया, फिर हुई रेड’
गुरुवार को मीडिया से बातचीत में भूपेश बघेल ने कहा कि अमित शाह ने उन्हें कॉल कर कानूनी मामलों के बारे में पूछा। उन्होंने जवाब दिया कि विपक्ष में रहकर सरकार की कमियां उजागर करना उनका कर्तव्य है। बघेल का कहना है कि भले ही सीधे तौर पर बीजेपी में शामिल होने की बात नहीं कही गई, लेकिन फोन के तुरंत बाद उनके ठिकानों पर रेड पड़ गई, जिससे उन्हें उस कॉल का “असली मतलब” समझ आ गया।
उन्होंने स्पष्ट शब्दों में कहा— “बीजेपी में शामिल होने का कोई सवाल ही नहीं है।”
जांच एजेंसियों के दुरुपयोग का आरोप
भूपेश बघेल ने आरोप लगाया कि सत्ताधारी दल विपक्षी नेताओं की आवाज दबाने के लिए ईडी और आईटी जैसी केंद्रीय एजेंसियों का इस्तेमाल हथियार की तरह करता है। उनका कहना है कि पहले विपक्षी नेताओं पर एफआईआर दर्ज करवाई जाती है और फिर उन्हें “वॉशिंग मशीन” का ऑफर दिया जाता है। तंज कसते हुए उन्होंने कहा कि जो नेता भ्रष्टाचार के आरोपों में घिरे रहते हैं, वे बीजेपी में जाते ही “साफ-सुथरे” हो जाते हैं। इस संदर्भ में उन्होंने Himanta Biswa Sarma, Ajit Pawar और Narayan Rane का नाम लिया।
महादेव सट्टा ऐप का मुद्दा भी उठाया
बघेल ने चुनाव के दौरान उठे महादेव बेटिंग ऐप मामले का भी जिक्र किया। उन्होंने कहा कि चुनाव प्रचार के दौरान प्रधानमंत्री द्वारा इस मुद्दे को उठाया गया था, लेकिन आज भी ऑनलाइन बेटिंग जारी है। उन्होंने सवाल किया कि “प्रोजेक्शन मनी कौन ले रहा है?” हालांकि, बीजेपी पहले ही इन आरोपों को खारिज कर चुकी है और कहा है कि केंद्रीय एजेंसियां स्वतंत्र रूप से काम करती हैं, उनका किसी भी राजनीतिक मकसद से कोई लेना-देना नहीं है।
सियासी बयान से बढ़ी हलचल
भूपेश बघेल के इस बयान के बाद छत्तीसगढ़ की राजनीति में एक बार फिर आरोप-प्रत्यारोप का दौर तेज हो गया है। आने वाले दिनों में इस मुद्दे पर कांग्रेस और बीजेपी के बीच सियासी टकराव और बढ़ सकता है।